Aurangabad News: गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 29 जुलाई को औरंगाबाद में पहली बार महाकवि बाणभट्ट की स्मृति में भव्य बाणभट्ट महोत्सव का आयोजन किया जाएगा. इसकी तैयारियों को लेकर जनेश्वर विकास केंद्र एवं महोत्सव परिवार के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय अधिवक्ता संघ सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता जनेश्वर विकास केंद्र के अध्यक्ष रामजी सिंह ने की, जिसमें आयोजन की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया.
महाकवि बाणभट्ट की विरासत को मिलेगा नया आयाम
बैठक को संबोधित करते हुए सिद्धेश्वर विद्यार्थी ने कहा कि महाकवि बाणभट्ट भारतीय संस्कृति और संस्कृत साहित्य के ऐसे अमर साहित्यकार हैं, जिनकी रचनाएं आज भी विश्वभर में सम्मान के साथ पढ़ी जाती हैं. उन्होंने बताया कि बाणभट्ट का जन्म औरंगाबाद जिले के हसपुरा प्रखंड स्थित पीरू (प्रीतिकूट) में हुआ था. उनकी कालजयी कृति 'कादंबरी' विश्व साहित्य में विशिष्ट स्थान रखती है, जबकि 'हर्षचरित' संस्कृत साहित्य की अमूल्य धरोहर मानी जाती है.
उन्होंने कहा कि बाणभट्ट के व्यक्तित्व और कृतित्व को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से पहली बार इस महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. यह आयोजन जिले की ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा.
सम्राट अशोक भवन में होगा एक दिवसीय आयोजन
बैठक में जानकारी दी गई कि एक दिवसीय बाणभट्ट महोत्सव का आयोजन औरंगाबाद शहर के सम्राट अशोक भवन में किया जाएगा. कार्यक्रम के प्रथम सत्र में दीप प्रज्ज्वलन एवं उद्घाटन समारोह के बाद महाकवि बाणभट्ट के जीवन, साहित्य और भारतीय संस्कृति में उनके योगदान पर विचार संगोष्ठी आयोजित होगी. इसके बाद संस्कृत के विद्वानों, साहित्यकारों तथा सांस्कृतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा.
कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे आकर्षण
कला कौशल मंच के अध्यक्ष आदित्य श्रीवास्तव ने बताया कि महोत्सव की लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. कार्यक्रम में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लोक संस्कृति, संगीत और नृत्य के साथ संध्या बेला में भव्य कवि सम्मेलन आयोजित होगा. उन्होंने कहा कि स्थानीय कलाकारों और युवा कवियों को मंच पर प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि उनकी प्रतिभा को व्यापक पहचान मिल सके.
आयोजन की जिम्मेदारियां तय
बैठक में आयोजन से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं. लालदेव प्रसाद को महोत्सव का संयोजक, सुरेंद्र सिंह को सह-संयोजक तथा वरिष्ठ कवि लवकुश प्रसाद को कार्यक्रम संचालन एवं साहित्यिक गतिविधियों की जिम्मेदारी दी गई.
राष्ट्रीय पहचान दिलाने का लिया संकल्प
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि कार्यक्रम को सफल बनाने में पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एवं समाजसेवी सुमन सौरभ, समाजसेवी विवेक सिंह सहित कई प्रबुद्ध लोगों का सहयोग मिल रहा है. बैठक में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुरेंद्र प्रसाद मिश्र, वरिष्ठ कवि लवकुश प्रसाद, नगीना सिंह, उज्ज्वल रंजन, सिहेश कुमार सिंह, वीरेंद्र सिंह, धर्मेंद्र यादव, सुरेंद्र सिंह सहित महोत्सव परिवार और जनेश्वर विकास केंद्र के कई सदस्य मौजूद रहे.
बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने संकल्प लिया कि बाणभट्ट महोत्सव को आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने तथा महाकवि बाणभट्ट की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे.
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