सुरक्षित प्रसव का लक्ष्य, पर फ्रंटलाइन योद्धा बेहाल, समीक्षा बैठक में दिखा दोहरा सच

Aurangabad News :आठ महीने से मानदेय नहीं मिलने पर आशा कार्यकर्ताओं ने जताई नाराजगी

आठ महीने से मानदेय नहीं मिलने पर आशा कार्यकर्ताओं ने जताई नाराजगीदाउदनगर. अनुमंडलीय अस्पताल सभागार में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से समीक्षा बैठक आयोजित की गयी. बैठक अस्पताल उपाधीक्षक डॉ शांता कुमारी की अध्यक्षता में हुई. इसमें क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं को संस्थागत प्रसव बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया. बीसीएम अमृता कुमारी ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिये. उपाधीक्षक डॉ शांता कुमारी ने आशा कार्यकर्ताओं से कहा कि वे गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए लगातार प्रेरित करें. हाई रिस्क प्रेगनेंसी की समय पर पहचान कर उन्हें अस्पताल तक लाने पर विशेष जोर दिया गया. उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर किया जाने वाला सी-सेक्शन पूरी तरह सुरक्षित है और अस्पताल में अनुभवी चिकित्सकों की टीम के साथ अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध है. अस्पताल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया गया कि अप्रैल में 272 गर्भवती महिलाओं का नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड किया गया. इससे अस्पताल पर आम लोगों का भरोसा बढ़ा है. इस सुविधा से गरीब मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर खर्च नहीं करना पड़ रहा है. बीसीएम ने आशा कार्यकर्ताओं को क्षेत्र में कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र भेजने के निर्देश दिये. उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों के इलाज और पोषण की पूरी व्यवस्था सरकार द्वारा की जाती है.

मानदेय लंबित होने पर नाराजगी

बैठक में जहां स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सकारात्मक पहलुओं पर चर्चा हुई, वहीं आशा ने अपनी समस्याएं भी उठाईं. कई आशा ने बताया कि उन्हें सितंबर 2025 से अब तक मानदेय नहीं मिला है. आठ महीनों से भुगतान लंबित रहने के कारण आर्थिक संकट गहरा गया है. रीता देवी, बसंती देवी, श्रीमती देवी और अमृता कुमारी ने बताया कि वेतन नहीं मिलने से घर चलाना मुश्किल हो गया है. बच्चों की पढ़ाई, राशन और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उधार लेना पड़ रहा है, लेकिन अब दुकानदार भी उधार देने से इनकार कर रहे है. उन्होंने कहा कि वे दिन-रात प्रसव, टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं में लगी रहती हैं, लेकिन मानदेय भुगतान को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता. बैठक के अंत में उपाधीक्षक ने समन्वय के साथ कार्य करने और शत-प्रतिशत सुरक्षित प्रसव का लक्ष्य हासिल करने पर जोर दिया. हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि इस लक्ष्य को पूरा करने वाली आशा कार्यकर्ता खुद आर्थिक तंगी और असुरक्षा से जूझ रही हैं.

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By SUJIT KUMAR

SUJIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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