दाउदनगर. दाउदनगर-बारुण रोड एवं एनएच-120 पर स्थित शहीद प्रमोद सिंह चौक इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बन गया है. कभी नगर पर्षद द्वारा सुसज्जित कर आकर्षण का केंद्र बनाये जाने वाला यह चौराहा अब अव्यवस्था का प्रतीक बन चुका है. यहां से गुजरने वाले राहगीर हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर है. इस चौक की सबसे बड़ी समस्या सड़क किनारे खड़े जब्त वाहनों की लंबी कतार है. दाउदनगर थाना द्वारा विभिन्न मामलों में जब्त किये गये वाहनों को व्यवस्थित रखने के बजाय सीधे सड़क किनारे खड़ा कर दिया जाता है. हालात तब और खराब हो जाते हैं, जब परिवहन, वाणिज्य कर और खनन विभाग द्वारा पकड़ी गयी गाड़ियों को भी यहीं लाकर छोड़ दिया जाता है. नतीजा यह है कि सड़क का बड़ा हिस्सा स्थायी पार्किंग में तब्दील हो गया है, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना परिसर में जगह की कमी का बहाना बनाकर सड़क को पार्किंग बना देना पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है. इस सड़क पर भारी-भरकम ट्रकों और जब्त वाहनों के बीच से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है, खासकर तब जब उसी रास्ते से तेज रफ्तार वाहन लगातार दौड़ते रहते है. इस इलाके की भौगोलिक स्थिति भी खतरे को और बढ़ा देती है. यह क्षेत्र सोन नदी के किनारे स्थित है, जहां बड़े पैमाने पर बालू खनन होता है. दिन-रात बालू से लदे ट्रकों की आवाजाही बनी रहती है. ये ट्रक अक्सर तेज गति में चलते हैं और सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों के बीच से निकलते समय बड़े हादसों का कारण बन सकते है. स्थानीय निवासियों के अनुसार अब तक इस रोड पर कई सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है. हाल ही में सोन पुल रोड पर एक अज्ञात वाहन की टक्कर से एक युवक की मौत ने एक बार फिर इस समस्या को उजागर कर दिया है. हालांकि हर हादसे के बाद कुछ समय तक चर्चा जरूर होती है, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में हालात जस के तस बने रहते है. इस मुद्दे पर स्थानीय लोगों, दुकानदारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है. उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले दिनों में और भी गंभीर हादसे हो सकते है. इसी बीच क्षेत्रीय विधायक डॉ प्रकाश चंद्र ने इस समस्या को लेकर पहल की. मंगलवार को उन्होंने क्रेन मंगवाकर सड़क किनारे खड़े वाहनों को हटवाने का प्रयास किया, जिसमें कुछ गाड़ियां हटाई भी गयी. हालांकि, तकनीकी कारणों से अधिकांश वाहन वहीं खड़े रह गये. कुछ वाहनों में जीपीएस लॉक लगे होने और अन्य तकनीकी वजहों से उन्हें हटाया नहीं जा सका. विधायक पहले भी डीएम को पत्र लिखकर यातायात प्रबंधन को दुरुस्त करने और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर चुके हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा. क्या हर बार किसी की जान जाने के बाद ही कार्रवाई होगी. यदि थाना परिसर में जगह की कमी है, तो जब्त वाहनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही. क्या सड़क को ही स्थायी पार्किंग स्थल बना देना ही समाधान है. समस्या के समाधान के लिए जरूरी है कि जब्त वाहनों के लिए अलग से सुरक्षित स्थान चिह्नित किया जाये, चौक को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त किया जाये और बालू लदे ट्रकों एवं अन्य वाहनों की गति पर सख्त नियंत्रण लागू किया जाए. साथ ही इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए.
Aurangabad News : शहीद प्रमोद सिंह चौक बना जब्त वाहनों का अड्डा, डरे-सहमे रहते हैं राहगीर
Aurangabad News: बालू ट्रकों की तेज रफ्तार और अतिक्रमण से लगातार बनी रहती है दुर्घटना की आशंका
