औरंगाबाद सदर अस्पताल में CT Scan रिपोर्ट में कथित फेरबदल, डीएम के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच टीम गठित

Aurangabad News: औरंगाबाद सदर अस्पताल में CT Scan रिपोर्ट में कथित बदलाव के आरोप के बाद जिला प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है. सिविल सर्जन ने प्रथम दृष्टया रिपोर्ट एडिट होने की बात कही.

Aurangabad News: (मनीष राज सिंघम) औरंगाबाद सदर अस्पताल में मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट से कथित छेड़छाड़ का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार सीटी स्कैन रिपोर्ट में बदलाव किए जाने के आरोप ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार के प्रधान सचिव के निर्देश पर जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है. जिलाधिकारी और सिविल सर्जन स्वयं पूरे प्रकरण की निगरानी कर रहे हैं.

मिली जानकारी के अनुसार ओबरा निवासी अंकित श्रीवास्तव मारपीट की एक घटना में घायल होने के बाद इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचे थे. चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत उनका सीटी स्कैन कराया गया. बाद में जब उन्हें और उनके परिजनों को रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई तो रिपोर्ट की सत्यता पर संदेह उत्पन्न हुआ.

मूल रिपोर्ट और मरीज को दी गई रिपोर्ट में मिला अंतर

आरोप है कि मरीज को उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट में कुछ ऐसे तथ्य दर्ज थे, जो मूल जांच रिपोर्ट से मेल नहीं खाते थे. शिकायत के बाद जब मामले की जांच शुरू हुई तो प्रारंभिक जांच में मूल रिपोर्ट और मरीज को दी गई रिपोर्ट में अंतर पाए जाने की बात सामने आई. मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद इसे गंभीरता से लिया गया और विस्तृत जांच का आदेश दिया गया.

सांकेतिक तस्वीर

तीन सदस्यीय जांच टीम करेगी पूरे मामले की जांच

सूत्रों से जानकारी मिली कि प्रधान सचिव के निर्देश के बाद जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को तीन सदस्यीय जांच टीम गठित करने का निर्देश दिया है. जांच दल को निष्पक्ष जांच कर जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. टीम अस्पताल के चिकित्सकों, तकनीकी कर्मियों और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है. साथ ही सीटी स्कैन मशीन और रिपोर्टिंग सिस्टम से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं.

सीटी स्कैन सेंटर के कर्मी ने स्वीकारा, रिपोर्ट में किया गया था बदलाव

जांच के दौरान एक अहम तथ्य सामने आया है. सूत्र बताते है कि सीटी स्कैन सेंटर के संचालक शशि रंजन कुमार ने स्वीकार किया है कि मूल रिपोर्ट तैयार होने के बाद उसमें बदलाव किया गया था. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर रिपोर्ट किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में बदली गई.

बताया जाता है कि मरीज से संबंधित सभी सीटी स्कैन रिपोर्ट ई-मेल के माध्यम से अस्पताल प्रशासन को उपलब्ध करा दी गई हैं. तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से यह भी जांच की जा रही है कि रिपोर्ट में कब, किस स्तर पर और किस कंप्यूटर सिस्टम से बदलाव किया गया.

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पहले भी इंज्युरी रिपोर्ट बदलने को लेकर हुआ था विवाद

सूत्रों के अनुसार इससे पहले भी सदर अस्पताल में इंज्युरी रिपोर्ट बदलने को लेकर विवाद सामने आ चुका है. उस समय भी मामले ने तूल पकड़ा था, लेकिन किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी.

इसके कारण अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. वैसे मारपीट के बाद सभी की नजरें पिसी पर ही टिकी रहती है. लोगों को न्याय के लिए इससे ही उम्मीद होता है, लेकिन इसमे ही फेरबदल किया जाता है.

पीसी रिकॉर्ड में बदलाव का खेल, पैसे लेकर रिपोर्ट बदलने की चर्चा

जानकारी यह भी सामने आ रही है कि सीटी स्कैन विभाग द्वारा मरीजों को जो रिपोर्ट दी जाती है, वह तो मरीज के पास सुरक्षित रहती है, लेकिन कंप्यूटर के पीसी रिकॉर्ड में बाद में बदलाव किए जाने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक पीसी रिकॉर्ड विभाग में कार्यरत कर्मियों द्वारा दूसरे पक्ष से पैसे लेकर रिपोर्ट में फेरबदल करने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं.

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं. वैसे मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच में यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या जानबूझकर छेड़छाड़ की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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सिविल सर्जन बोले

सिविल सर्जन डॉ कृष्णा कुमार ने कहा कि मामला संज्ञान में है और इसकी जांच चल रही है. प्रथम दृष्टया कंप्यूटर से रिपोर्ट एडिट कर बदलने की बात सामने आ रही है. सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और पूरी रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक सभी संबंधित दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है.

मेडिकल रिपोर्ट से छेड़छाड़ न्यायिक प्रक्रिया पर भी डाल सकती है असर

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी मरीज की इंज्युरी या सीटी स्कैन रिपोर्ट में छेड़छाड़ न केवल चिकित्सकीय नैतिकता के विरुद्ध है, बल्कि इससे मरीज के उपचार, पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है. लगातार सामने आ रहे आरोपों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट से छेड़छाड़ का यह कथित खेल कब से चल रहा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं. अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं.

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Published by: Vivek Pandey

विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने ​बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. ​बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. ​जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.

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