औरंगाबाद में दहेज के लिए बहू को प्रताड़ित करने वाले पति व सास-ससुर को सजा, कोर्ट ने लगाया जुर्माना

Aurangabaad News: औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय ने दहेज उत्पीड़न मामले में पति, सास और ससुर को दोषी करार देते हुए 498ए और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत सजा सुनाई. जानिए पूरी घटना और अदालत का फैसला.

Aurangabad News: (सुजीत कुमार सिंह) औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय में दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में एसडीजेएम अनीस कुमार ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पति, सास और ससुर को दोषी करार दिया है और सजा सुनाई है. यह मामला महिला थाना कांड संख्या-17/24, जीआर संख्या-667/24 तथा टीआर संख्या-1814/26 से संबंधित है.

तीनों आरोपितों को मिली सजा

न्यायालय ने अभियुक्त पति अजीत कुमार, सास उर्मिला देवी और ससुर योगेंद्र सिंह (सभी निवासी जम्होर) को भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत दोषी पाते हुए प्रत्येक को दो-दो वर्ष का साधारण कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई.

इसके साथ ही दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा-4 के तहत नौ-नौ माह का अतिरिक्त कारावास और एक-एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी.

Ai तस्वीर

गवाहों की गवाही से साबित हुआ मामला

अभियोजन पदाधिकारी विकास कुमार ने बताया कि मुकदमे में कुल पांच गवाहों की गवाही कराई गई. शिकायतकर्ता सहित अन्य गवाहों ने अदालत में घटना की पुष्टि की, जिसके आधार पर आरोप साबित हुए.

गवाहों के अनुसार विवाह के लगभग दो महीने बाद ही ससुराल पक्ष द्वारा क्रेटा कार की मांग शुरू कर दी गई थी. मांग पूरी नहीं होने पर विवाहिता को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया.

पंचायत में भी सामने आया दबाव

अभियोजन पक्ष के अनुसार 6 मार्च 2024 को हुई पंचायत में पति ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “यदि फोर व्हीलर मिलेगा तभी पत्नी को साथ रखेगा. इसके अलावा 7 नवंबर 2023 को विवाहिता के गहने छीनकर उसे घर से निकाल देने की घटना भी अदालत में साबित हुई.

एफआईआर से लेकर सजा तक की प्रक्रिया

अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि पीड़िता ने 13 मार्च 2024 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि उसकी शादी 6 जून 2023 को हिंदू रीति-रिवाज से एक नौकरीपेशा युवक के साथ हुई थी.

शादी में लगभग 30 लाख रुपये मूल्य के उपहार दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर लगातार प्रताड़ना दी गई.

मामले में 23 अक्टूबर 2024 को आरोप गठन किया गया था और सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया.

अदालत का सख्त संदेश

यह फैसला दहेज उत्पीड़न के मामलों में न्यायिक सख्ती और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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By Vivek Ranjan

विवेक रंजन पाण्डेय पिछले 8 वर्षों से टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने Aryabhatta Knowledge University, Patna से BJMC की पढ़ाई की है.

उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत Network 10 टीवी चैनल से की. इसके बाद News India, News18 Digital सहित कई राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग और कंटेंट राइटिंग का अनुभव प्राप्त किया.

वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम में Content Writer के रूप में कार्यरत हैं. यहां बिहार की राजनीति, चुनाव, शिक्षा, कृषि, रोजगार, सरकारी योजनाओं, सामाजिक सरोकारों और विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों पर तथ्यपरक और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुंचाते हैं.

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