दाउदनगर से ओम प्रकाश की रिपोर्ट :
Aurangabad News : जिले के दाउदनगर अनुमंडल क्षेत्र में तेज रफ्तार वाहनों का कहर लगातार लोगों की जान ले रहा है. सड़क सुरक्षा को लेकर तमाम दावों और जागरूकता अभियानों के बावजूद दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. रविवार को हुई दो अलग-अलग भीषण सड़क दुर्घटनाओं में पांच लोगों की मौत और एक दर्जन से अधिक लोगों के घायल होने की घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जानकारी के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं के पीछे तेज रफ्तार, लापरवाही, गलत तरीके से ओवरटेक करना और यातायात नियमों की अनदेखी प्रमुख कारण हैं.
एक ही परिवार के तीन लोगों की मौके पर मौत
पहली घटना गोह थाना क्षेत्र के दधपी के पास हुई, जहां एक तेज रफ्तार कार और बालू लदे ट्रैक्टर के बीच आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई. इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. घायलों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है. स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दोनों घटनाओं का प्रमुख कारण वाहनों की अनियंत्रित गति रही. अनुमंडल के लगभग सभी प्रमुख मार्गों जैसे एनएच-139 पर औरंगाबाद-दाउदनगर-पटना मुख्य मार्ग हो, एनएच-120 पर दाउदनगर-गोह-गया पथ हो या फिर दाउदनगर-बारुण रोड, हर जगह वाहन चालक गति सीमा की अनदेखी करते नजर आते हैं.
कार ने ऑटो को मारी टक्कर
वहीं, दूसरी घटना दाउदनगर-बारुण रोड पर ओबरा थाना क्षेत्र के तेजपुरा लख के पास हुई. यहां एक तेज गति से आ रही कार ने ऑटो में टक्कर मार दी. दुर्घटना में ऑटो पर सवार दो लोगों की मौत हो गई, जबकि नौ अन्य लोग घायल हो गए. घायलों में दो की स्थिति गंभीर बताई जा रही है. यही वजह है कि आए दिन सड़कों पर हादसे हो रहे हैं और लोगों की जान जा रही है. कई परिवार अपने परिजनों को खो चुके हैं, जबकि अनेक लोग घायल होकर परेशानियों का सामना कर रहे हैं.
ग्रामीणों ने सुरक्षा से जुड़े उपाय करने की उठाई मांग
दाउदनगर-बारुण रोड स्थित तेजपुरा लख क्षेत्र अब दुर्घटना संभावित क्षेत्र के रूप में पहचान बनाने लगा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां सड़क घुमावदार है, जिसके कारण सामने से आने वाले वाहनों का सही अनुमान नहीं लग पाता. इसके बावजूद वाहन चालक तेज गति से गुजरते हैं, जिससे हादसों की संभावना बढ़ जाती है. ग्रामीणों का आरोप है कि इस संवेदनशील स्थल पर सुरक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है. न तो सड़क किनारे साइडर लगाए गए हैं, न रेडियम पट्टियां, न ही गति नियंत्रण संबंधी संकेतक बोर्ड लगाए गए हैं. दुर्घटना संभावित क्षेत्र का चेतावनी बोर्ड तक नहीं होने से वाहन चालक सतर्क नहीं हो पाते.
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां स्पीड ब्रेकर, चेतावनी बोर्ड, रेडियम संकेतक और अन्य सुरक्षात्मक उपाय तत्काल किए जाएं. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो तेज रफ्तार का यह कहर आगे भी मासूम जिंदगियों को निगलता रहेगा.
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