औरंगाबाद शहर. औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के जिला जज अष्टम मनीष कुमार जायसवाल ने खुदवां थाना कांड संख्या 03/13, एसटीआर-267/13 तथा 177/24 की सुनवाई करते हुए अभियुक्त पिता-पुत्र को सजा सुनाई है. एपीपी प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि रामनगर निवासी फेकू पासवान और उनके पुत्र सुजीत कुमार उर्फ भलुआ को भादंवि की धारा 304 के तहत 15 अप्रैल को दोषी ठहराया गया था और उन्हें बंधपत्र विखंडित कर जेल भेज दिया गया था. बुधवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को सात वर्ष सश्रम कारावास की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया है. जुर्माना न देने की स्थिति में एक वर्ष अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतनी होगी. अभियोजन की ओर से कुल 17 गवाहों की गवाही कराई गई थी. अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि रामनगर निवासी वाद सूचिका प्रभावती देवी ने 10 जनवरी 2013 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी. आरोप है कि 9 जनवरी 2013 की रात करीब नौ बजे उनके पति दिलेश्वर राम को अभियुक्तों ने लाठी-डंडे से बुरी तरह पीटकर घायल कर दिया था. शोर मचाने पर ग्रामीण जुटे, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गये. घायल को पुलिस ने इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ओबरा में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. बाद में सदर अस्पताल औरंगाबाद में पोस्टमार्टम कराया गया. घटना के पीछे पुरानी रंजिश को कारण बताया गया है. पुलिस ने बाद में दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया था.
Aurangabad News : हत्या मामले में पिता-पुत्र को सात वर्ष की सश्रम कारावास
Aurangabad News: 9 जनवरी 2013 की रात दिलेश्वर राम को अभियुक्तों ने लाठी-डंडे से बुरी तरह पीटकर घायल कर दिया था
