औरंगाबाद में प्रगतिशील मगही समाज का मंथन, स्थानीय उद्योग और विकेंद्रीकृत आर्थिक व्यवस्था पर दिया गया जोर

Aurangabad News : दाउदनगर में प्रगतिशील मगही समाज द्वारा आयोजित चिंतन शिविर में किसानों, मजदूरों और शिक्षित बेरोजगारों की समस्याओं पर चर्चा हुई. वक्ताओं ने स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग, विकेंद्रीकृत अर्थव्यवस्था और कृषि को मजबूत बनाने पर जोर दिया.

Aurangabad News : प्रगतिशील मगही समाज, औरंगाबाद के तत्वावधान में दाउदनगर के लखन मोड़ स्थित न्यूटन विज्ञान एवं प्रावैधिकी संस्थान परिसर में किसान, मजदूर, शिक्षित बेरोजगार एवं प्रबुद्धजनों का चिंतन शिविर आयोजित किया गया. शिविर में वर्तमान व्यवस्था में किसानों, मजदूरों और शिक्षित बेरोजगारों की समस्याओं के साथ समाज में नैतिक मूल्यों के लगातार हो रहे ह्रास के कारणों और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई.

स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर दिया जोर

मुख्य वक्ता प्राउटिस्ट सर्व समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य दिलीप सागर, महासचिव ध्रुवनारायण, प्रगतिशील मगही समाज के केंद्रीय सचिव रवींद्र कुमार, जनसंपर्क सचिव उमेश, संरक्षक डॉ. गौरीशंकर प्रसाद तथा प्रधानाध्यापक अंबुज कुमार सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि आज देश का अन्नदाता किसान बदहाल है, मजदूर फटेहाल है और पढ़ा-लिखा युवा बेरोजगारी की मार झेल रहा है. वहीं समाज में नैतिक मूल्यों का लगातार पतन चिंता का विषय बन गया है. उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का स्थायी समाधान प्रत्येक क्षेत्र में उपलब्ध स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों, कृषि व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत के समुचित उपयोग में निहित है.

कृषि को बताया देश की रीढ़

वक्ताओं ने कहा कि कृषि देश की रीढ़ है. यही क्षेत्र शत-प्रतिशत लोगों के भोजन की व्यवस्था करता है और लगभग 80 प्रतिशत आबादी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराता है. इसके बावजूद किसान अपनी उपज का मूल्य तय करने का अधिकार नहीं रखता, जबकि उद्योगपति अपने उत्पादों की कीमत स्वयं निर्धारित करते हैं. इसे व्यवस्था की बड़ी विडंबना बताया गया.

स्थानीय उद्योगों से रुकेगा पलायन

वक्ताओं ने कहा कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है. विभिन्न क्षेत्रों की भाषा, संस्कृति, परंपरा और आर्थिक उत्पादन प्रणाली देश की समृद्ध विरासत है. यदि स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उद्योगों का संचालन स्थानीय लोगों की भागीदारी से किया जाए और इसके लिए कानूनी व्यवस्था बने तो रोजगार के लिए पलायन रुकेगा तथा प्रत्येक क्षेत्र आत्मनिर्भर बन सकेगा.

विकेंद्रीकृत आर्थिक व्यवस्था की वकालत

चिंतन शिविर में वक्ताओं ने कहा कि पूंजीवाद की केंद्रीकृत आर्थिक नीति के कारण देश की सप्लाई चेन बाहरी ताकतों पर निर्भर होती जा रही है, जिससे आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां बढ़ रही हैं. स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और विकेंद्रीकृत आर्थिक व्यवस्था अपनाकर किसानों, मजदूरों और युवाओं की समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है. कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भी अपने विचार रखते हुए स्थानीय विकास आधारित आर्थिक मॉडल को समय की आवश्यकता बताया.

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Published by: Om prakash

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