Aurangabad News: करोड़ों की लागत से बन रहे चेकडैम में निर्माण के दौरान ही पड़ी दरार, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल 8.85 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे तीन चेकडैमों में से पिपरा बगाही परियोजना में सामने आई बड़ी खामी फोटो कैप्शन : पिपरा बगाही में निर्माणाधीन चेकडैम की दाहिनी दीवार में पड़ी बड़ी दरार अंबा. बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हर खेत तक सिंचाई का पानी के तहत कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र की बतरे नदी पर करोड़ों रुपये की लागत से कराए जा रहे चेकडैम निर्माण कार्य की गुणवत्ता सवालों के घेरे में आ गई है.
निर्माणाधीन दीवार में ऊपर से नीचे तक दरार
निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही पिपरा बगाही में बन रहे चेकडैम की दाहिनी दीवार में ऊपर से नीचे तक बड़ी दरार पड़ गई है. निर्माणाधीन संरचना में आई इस गंभीर खामी ने न केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता बल्कि विभागीय निगरानी और तकनीकी मानकों के पालन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. बनते के साथ ही दरार आने से गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं तथा लोग तरह की चर्चा कर रहे हैं. तीन चेकडैमों पर खर्च हो रहे हैं.
मरम्मत की जगह छिपाने का आरोप
8.85 करोड़ रुपये जानकारी के अनुसार, लघु जल संसाधन विभाग द्वारा कुटुंबा प्रखंड के पिपरा बगाही, लभरी खुर्द और करकटा में बतरे नदी पर तीन चेक डैमों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है. इन तीनों परियोजनाओं की कुल स्वीकृत राशि 8 करोड़ 85 लाख 40 हजार 323 रुपये है. इनमें पिपरा बगाही स्थित चेकडैम का निर्माण कार्य लगभग अंतिम स्टेज में है.
बिना पानी के दबाव में ही कमजोर संरचना
इसी दौरान इसकी एक प्रमुख दीवार में आई बड़ी दरार ने पूरे निर्माण कार्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. निर्माण के दौरान ही दीवार में दरार पड़ गई है. उठने लगे कई सवाल स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि चेकडैम की दाहिनी ओर की दीवार में ऊपर से नीचे तक स्पष्ट रूप से दरार दिखाई दे रही है. ग्रामीणों के अनुसार, जब उन्होंने निर्माण एजेंसी के कर्मियों से इस संबंध में पूछताछ की तो बताया गया कि दबाव के कारण दीवार में दरार आई है और इसे तोड़कर दोबारा बनाया जाएगा, लेकिन बाद में दरार वाले हिस्से को हटाने के बजाय उस पर सीमेंट का प्लास्टर कर और मिट्टी डालकर उसे छिपाने का प्रयास किया गया.
किसानों के लिए लाभ पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि अभी नदी में पानी का बहाव भी नहीं है और चेकडैम पर किसी प्रकार का विशेष दबाव नहीं पड़ा है. ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान ही दीवार का फट जाना निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के अनुपालन और कार्य निष्पादन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है. पहली परीक्षा से पहले ही कमजोर पड़ने लगी संरचना ग्रामीणों का कहना है कि चेकडैम की वास्तविक परीक्षा तो बरसात के दौरान होगी, जब उसमें पानी का दबाव पड़ेगा. ऐसे में यदि बिना पानी के दबाव के ही संरचना में दरार पड़ रही है तो भविष्य में इसके टूटने या क्षतिग्रस्त होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित होने वाली परियोजना का यह हाल चिंता का विषय है. निर्माण स्थल के चयन पर भी उठे सवाल स्थानीय किसानों ने चेकडैम निर्माण के लिए चयनित स्थल पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि जिस स्थान पर निर्माण कराया जा रहा है, वहां से आसपास के किसानों को अपेक्षित सिंचाई लाभ मिलने की संभावना बेहद कम है.
उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का उद्देश्य किसानों तक सिंचाई सुविधा पहुंचाना है, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि योजना का लाभ किसानों से अधिक संवेदक को मिल रहा है. उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों और संवेदकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि यदि अभी से निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो करोड़ों रुपये की यह परियोजना भविष्य में सरकारी धन की बर्बादी का उदाहरण बन सकती है. अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच कराता है या फिर इसे सामान्य तकनीकी खामी बताकर मामले को दबाने का प्रयास किया जाता है.
