दुलारे पंचायत के मुखिया की गिरफ्तारी के विरोध में संघ ने जतायी नाराजगी

जांच करना संवैधानिक अधिकार, सरकारी योजनाओं को लागू करना हमारी जिम्मेदारी

प्रेसवार्ता कर प्रशासन की कार्यशैली पर जताया विरोध जांच करना संवैधानिक अधिकार, सरकारी योजनाओं को लागू करना हमारी जिम्मेदारी फोटो नंबर-6- प्रेसवार्ता में पंचायतों के मुखिया. प्रतिनिधि, औरंगाबाद ग्रामीण. दुलारे पंचायत के मुखिया विजेंद्र यादव की गिरफ्तारी का मुखिया संघ ने विरोध जताया है. बुधवार को शहर के होटल सरस्वती इन में मुखिया संघ की ओर से एक प्रेसवार्ता की गयी, जिसकी अध्यक्षता मुखिया संघ अध्यक्ष सुजीत कुमार सिंह ने की. इस दौरान विभिन्न पंचायतों के कई मुखिया मौजूद रहे. सभी मुखियाओं ने मुखिया विजेंद्र यादव की गिरफ्तारी का विरोध किया और जिला प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जतायी. मुखिया संघ के नेताओं ने कहा कि विजेंद्र यादव की गिरफ्तारी दुर्भावना से प्रेरित होकर की गयी है. संघ के अध्यक्ष सुजीत सिंह ने कहा कि जिस कार्य का विरोध करने पर मुखिया की गिरफ्तारी हुई है, उस भवन निर्माण कार्य में नियमों को ताक पर रखकर बालू की जगह डस्ट से निर्माण कराया जा रहा था. मुखिया विजेंद्र यादव जब अपने अधिकार के तहत निर्माण स्थल की जांच करने पहुंचे, तो वहां गंभीर अनियमितताएं पायी गयीं. उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार का विरोध करने पर मुखिया पर बेवजह गलत आरोप लगाये गये और उनके साथ मारपीट भी की गयी. इसके बाद षड्यंत्र के तहत ढिबरा थाने में झूठी प्राथमिकी दर्ज कराकर 24 घंटे के अंदर उनकी गिरफ्तारी कर ली गयी. सुजीत सिंह ने कहा कि अगर भ्रष्टाचार उजागर करने पर मुखिया की गिरफ्तारी हो सकती है, तो फिर गलत तरीके से हो रहे सभी कार्यों को भी तुरंत बंद किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सभी मुखिया अब संबंधित निर्माण स्थलों का सामूहिक रूप से निरीक्षण करेंगे और जहां भी गड़बड़ी पायी जायेगी, वहां काम बंद करायेंगे. उन्होंने कहा कि पूरे जिले में सरकारी सिस्टम भ्रष्टाचार में लिप्त है और ईमानदारी से काम करना पंचायत प्रतिनिधियों के लिए मुश्किल होता जा रहा है. जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि औरंगाबाद जिले में किसी भी बूचड़खाना का लाइसेंस नहीं है. इसके बावजूद खुलेआम हत्या और अवैध गतिविधियां हो रही हैं. जब कोई मुखिया भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उस पर रंगदारी और गुंडागर्दी जैसे गंभीर आरोप मढ़ दिये जाते हैं. इससे साफ है कि सरकार को बदनाम करने का काम खुद स्थानीय अधिकारी कर रहे हैं. संघ के नेताओं ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की. साथ ही चेतावनी दी कि अगर किसी भी मुखिया को इस तरह जेल भेजा गया, तो पूरे जिले में आंदोलन किया जायेगा. जरूरत पड़ी, तो सभी मुखिया अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जायेंगे. थानेदार पर लगाया आरोप सूही पंचायत के मुखिया मंजीत यादव ने कहा कि पंचायत क्षेत्र में हो रहे किसी भी विकास कार्य की जांच करना मुखिया का संवैधानिक अधिकार है. सरकार की योजनाओं को सही तरीके से लागू करना उनकी जिम्मेदारी है. उन्होंने आरोप लगाया कि जूनियर इंजीनियर के माध्यम से थाने में गलत आवेदन दिया गया और बिना जांच के गिरफ्तार कर लिया गया. उन्होंने थानाध्यक्ष पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर कौन सा नियम है, जिसमें बिना जांच-पड़ताल के जनप्रतिनिधि को गिरफ्तार कर लिया जाता है. अगर, मुखिया को रंगदारी मांगनी होती, तो वह ठेकेदार से मांगता, जेई से नहीं. उन्होंने बिहार में अफसरशाही हावी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि आज प्रदेश में अफसरों की सरकार चल रही है. सभी मुखियाओं ने कहा कि अधिकारी खुलेआम लूट मचाये हैं और पंचायत प्रतिनिधियों को डराकर चुप कराने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. इस दौरान मुखिया उदय नारायण सिंह, निशा देवी, रवींद्र यादव, विशाल कुमार, गुड्डू यादव, गुलाम सरवर, अनिल पासवान, धनंजय यादव, अल्पा कुमारी आदि मुखिया मौजूद रहे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By SUJIT KUMAR

SUJIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >