20 साल से न्याय के लिए लड़ रहे शिक्षक अभ्यर्थी ने आत्मदाह की दी धमकी

सुबह से ही कार्यालय पर पदाधिकारियों का लगा जमावड़ा, चयन प्रक्रिया को अभ्यर्थी ने बताया गलत, निर्णय को फिलहाल टाला

सुबह से ही कार्यालय पर पदाधिकारियों का लगा जमावड़ा, चयन प्रक्रिया को अभ्यर्थी ने बताया गलत, निर्णय को फिलहाल टाला

ओबरा. वर्ष 2005 में शिक्षा मित्र में बहाल शिक्षक अभ्यर्थी के आत्मदाह की चेतावनी पर प्रखंड के पदाधिकारियों में हड़कंप मच गया. वैसे मामला सिर्फ औरंगाबाद के अधिकारियों तक ही नहीं बल्कि अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के निदेशक तक पहुंचा. 26 नवंबर को ओबरा बीआरसी के समीप आत्मदाह की चेतावनी दी गयी थी. ऐसे में उसे आत्मदाह से रोकने के लिए प्रखंड प्रशासन से लेकर पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ गया. बुधवार की सुबह से ही बीआरसी के समीप प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी जुही कुमारी, सीओ हरिहरनाथ पाठक, थानाध्यक्ष नीतीश कुमार दल-बल के साथ मौजूद थे. हालांकि, उक्त शिक्षक अभ्यर्थी आत्मदाह करने नहीं पहुंचा, बल्कि उसने निर्णय को टाल दिया. पदाधिकारियों ने उसे समझा-बुझाकर न्याय का भरोसा दिया है.

क्या है मामला

ओबरा प्रखंड के चंदा गांव निवासी शिक्षक अभ्यर्थी रामबचन दास ने अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विभाग पटना व औरंगाबाद जिले के संबंधित पदाधिकारियों को आवेदन दिया था. वर्ष 2005 में शिक्षा मित्र की बहाली में चयन समिति द्वारा धांधली कर थर्ड डिविजन वाले की नियुक्ति कर दी गयी. 20 वर्षों से वह लगातार पत्राचार करते आ रहा है. हर जगह उसके पक्ष में रिपोर्ट आता है, लेकिन उसकी नियुक्ति नहीं हुई. 20 वर्षों से वह परेशान है. ऐसे में 2005 से उसकी नियुक्ति कर वेतन निकासी का आदेश दिया जाये. पत्र में रामबचन ने स्पष्ट तौर पर कहा कि अगर उसके आवेदन पर विचार नहीं हुआ तो वह 26 नवंबर को प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय के समक्ष पूरे परिवार के साथ आत्मदाह कर लेगा. इधर, रामबचन ने बताया कि उसपर गलती नहीं करने का दबाव बनाया गया है. इसलिए उसने अपने निर्णय को कुछ समय के लिए टाल दिया है. न्यायालय पर उसे भरोसा है.

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By SUJIT KUMAR

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