नेकी व कुरबानी का पैगाम देता है मुहर्रम

हसपुरा : हसपुरा में शांति व सौहार्द के साथ मुहर्रम का त्योहार संपन्न हो गया. बुधवार को देर शाम तक ताजिया में रखी मिट्टी की पहलाम ब्लॉक काॅलोनी के समीप सैकड़ों वर्ष पुरानी बनी कर्बला में हो गया. बताया जाता है कि इस्लाम धर्म में रमजान की तरह मुहर्रम का महीना भी खुदा की इबादत […]

हसपुरा : हसपुरा में शांति व सौहार्द के साथ मुहर्रम का त्योहार संपन्न हो गया. बुधवार को देर शाम तक ताजिया में रखी मिट्टी की पहलाम ब्लॉक काॅलोनी के समीप सैकड़ों वर्ष पुरानी बनी कर्बला में हो गया.
बताया जाता है कि इस्लाम धर्म में रमजान की तरह मुहर्रम का महीना भी खुदा की इबादत के लिए खास माना जाता है. कहा जाता है कि इस्लामिक कैलेंडर हिजरी संवत में मुहर्रम के महीने से ही साल की शुरुआत होती है. मुसलिम धर्मावलंबियों के अनुसार इस महीने की दस तारीख को हजरत मोहम्मद इमाम साहब के नवासे इमाम हुसैन और उनके साथ 71 लोगों ने अपनी शहादत दी थी.
इसी शहादत की याद में मुहर्रम का त्योहार मनाया जाता है. इमाम हुसैन अपने उसूलों के लिए शहीद हुए थे.मुहर्रम का त्योहार नेकी और कुरबानी का पैगाम देता है. इस महीने में किसी तरह का शुभ काम नहीं होता है. मुहर्रम के दिन सैकड़ों की संख्या में ताजिया अमझर शरीफ अखाड़ा में पहुंचता है और कलाकार करतब दिखा कर प्रदर्शन करते है. इसके उपरांत देर शाम जुलूस के साथ हसपुरा ब्लॉक कालोनी के समीप करबला में इमाम साहब की याद में पहलाम कर रस्म पूरी करते हैं.
अमझर शरीफ मुहर्रम कमेटी के भोला कुरैशी, हसपुराडीह के शहजाद अंसारी ने बताया कि मुहर्रम में प्रत्येक साल ताजिया अमझर शरीफ में हिंदू परिवार के राम ईश्वर चौधरी, उमेश चौधरी बनाते हैं और पहलाम के पूर्व पूरी रात जाग कर इमाम हुसैन की नफली नमाज पढ़ कर अपने दिलों में याद करते हैं.

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