रामाबांध बस स्टैंड से हर दिन विभिन्न शहरों के लिए दर्जनों बसें खुलती हैं. हजारों यात्री बस पकड़ने आते हैं. लेकिन, बस स्टैंड की हालत बदहाल है. यह शहर के लिए किसी दुर्भाग्य से कम नहीं.
औरंगाबाद (नगर) : वर्ष 2000 में जिला प्रशासन द्वारा औरंगाबाद शहर में ओवरब्रिज से 500 गज की दूरी पर रामाबांध में बस स्टैंड बनाया गया था. उस वक्त तत्कालीन डीएम द्वारा लंबी-लंबी घोषणाएं की गयी थीं. आज रामाबांध बस स्टैंड की स्थापना के 16 वर्ष हो गये, लेकिन बस स्टैंड का विकास नहीं हो सका है.
रामाबांध बस स्टैंड की स्थिति यह है कि यहां दो से चार फुट तक गड्ढे हैं. जब स्टैंड से बसें खुलती हैं, तो हिचकोले मारते हुए सड़क पर पहुंचती हैं. कब कौन वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाये, यह कहना मुश्किल है. स्टैंड में यात्रियों के बैठने व ठहरने की भी व्यवस्था नहीं है.
स्टैंड में शौचालय व पीने का पानी तक नहीं है. वर्ष 2013 में तत्कालीन डीएम अभय कुमार सिंह ने बस स्टैंड का निरीक्षण किया था और कहा था कि 75 लाख रुपये की लागत से इसका जीर्णोद्धार कराया जायेगा. लेकिन, आज तक बस स्टैंड का जीर्णाद्धार नहीं हो सका. हालांकि, एक यात्री शेड बनाया गया था, लेकिन पुलिस ने ही उसका अतिक्रमण कर लिया गया और वहां पुलिसबल तैनात कर दिया गया. इस कारण सर्दी, गरमी व बरसात में यात्रियों को इधर -उधर भटकना पड़ रहा है. इसके अलावा बस स्टैंड में पर्याप्त जगह नहीं रहने के कारण अधिकांश वाहन सड़क पर ही लगे रहते हैं. इस कारण हर दिन बस स्टैंड के सामने जाम की समस्या रहती है.
