सदर अस्पताल में आज भी चिकित्सा के नाम पर लोग ठगे जा रहे हैं. एक्सरे व अल्ट्रासाउंड करने वाले अयोग्य कर्मचारियों पर आरोप तय होने के बावजूद सदर अस्पताल में यह सिस्टम चल रहा हैं. एक तरफ सीएस आदेश जारी करते हैं कि अल्ट्रासांउड प्रावधान का पालन नहीं किया जा रहा है, इसलिए योग्य व्यक्तियों द्वारा इसका संचालन किया जाये. लेकिन, सीएम अब उक्त आदेश को ही भूल गये है.
मामला सदर अस्पताल में अयोग्य व्यक्ति से अल्ट्रासाउंड व एक्सरे चलाने का
एक माह पहले आइजीएमइएस को दिया था आदेश एकारनामा रद्द करने का आदेश
औरंगाबाद (सदर) : सदर अस्पताल, औरंगाबाद में फर्जी योग्यताधारी व्यक्ति द्वारा अल्ट्रासाउंड व एक्सरे संचालित करने का आरोप है. सदर अस्पताल के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह सिविल सर्जन (सीएस) ने आरोपकर्ता के प्रत्येक बिंदुओ पर जांच करने के बाद इसमे सत्यता भी पायी थी. इसके बाद उन्होंने 30 जनवरी, 2016 को एक आदेश भी जारी किया था.
आदेश में सीएस आरपी सिंह ने कहा था कि सदर अस्पताल में संचालित एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जिस व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा है, उसकी योग्यता मात्र इंटरमीडिएट (कला) है, जबकि एक्सरे टेक्नीशियन के लिए डीएमआरडी/ डीआरडी कोर्स होना अनिवार्य है.
डीएमआरडी/डीआरडी के लिए स्वास्थ्य विभाग की अधिसूचना संख्या-1028, दिनांक 31.12.2005 व राज्य स्वास्थ्य समिति पटना के ज्ञापांक 4649, दिनांक 08.06.2012 के आलोक में इंटरमीडिएट (विज्ञान) होना अनिवार्य है. सीएस ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के तहत अल्ट्रासांउड प्रावधान का पूर्णत: पालन नहीं किया जा रहा. एक्सरे व अल्ट्रासांउड जनहित से जुड़ा होने के कारण इनके अभाव में सदर अस्पताल में इलाज कराने आये मरीजों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
इससे सदर अस्पताल की विधि व्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ता है. इस स्थिति में सीएस ने आरोप को सत्यता सिद्ध करते हुये एक्सरे एवं अल्ट्रासांउड कार्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था और आइजीएमइएस को आदेश दिया था कि एकरारनामा व राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के ज्ञापांक 5752, दिनांक 13.7.12 का पालन कर तीन दिनों के अंदर एक्सरे व अल्ट्रासांउड का संचालन योग्य व्यक्तियों द्वारा सुनिश्चित किया जाये, अन्यथा एकरारनामा रद्द करने की कार्रवाई की जायेगी.
लेकिन, इस आदेश के एक माह बीत जाने के बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी. आज भी सदर अस्पताल के मरीज अयोग्य टेक्नीशियनों से इलाज कराने पर मजबूर हैं.
इधर, सिविल सर्जन ने कहा कि उन्हे यह स्मरण नही कि यह आदेश कब जारी किया गया था. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग से जो लोग इलाज के उम्मीद लगाये बैठे है वे कहीं न कहीं अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं.
