टॉयलेट्स की झेल रहे कमी

औरंगाबाद (सदर) : स्वास्थ्य व जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए शौचालय व पेशाब घर का होना बेहद आवश्यक है. शहर में कहीं भी सार्वजनिक शौचालय नहीं रहने के कारण शहर के लोगों को परेशानी हो रही है. लोगों की सुविधाओं के लिए नगर पर्षद द्वारा शहर में शौचालय व पेशाब घर की कहीं […]

औरंगाबाद (सदर) : स्वास्थ्य व जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए शौचालय व पेशाब घर का होना बेहद आवश्यक है. शहर में कहीं भी सार्वजनिक शौचालय नहीं रहने के कारण शहर के लोगों को परेशानी हो रही है. लोगों की सुविधाओं के लिए नगर पर्षद द्वारा शहर में शौचालय व पेशाब घर की कहीं भी व्यवस्था नहीं की गयी है. इसके अभाव में लोग सड़क के किनारे शौच व पेशाब करने करते हैं. ऐसे में ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है.
कभी-कभी हो जाती है मुसीबत
शहर के अंदर बाजार के व्यवसायी आलोक कुमार, विनय कुमार, संतोष कुमार, अनूप कुमार, गुड्डू कुमार, ललन प्रसाद व अरुण गुप्ता आदि ने बताया कि बाजार में कहीं भी पेशाब घर नहीं है. इससे लोगों को परेशानी होती है. खुले में पेशाब करने से कभी-कभी मुसीबत खड़ी हो जाती है. आसपास के लोग हो-हल्ला मचाने लगते हैं. नाली में पेशाब करने की मनाही है. लेकिन लुक-छिप कर लोग मजबूरी में नाली का ही सहारा लेते हैं.
शौचालय हो गये बरबाद
पूर्व विधायक रामाधार सिंह द्वारा पूर्व में शहर के पुरानी जीटी रोड पर चार जगहों पर ऐच्छिक निधि से शौचालय का निर्माण कराया गया था. लेकिन, देखरेख और पानी के अभाव में ये चारों शौचालय बरबाद हो गये. शहर के लोगों ने बताया कि शौचालय की देखरेख के लिये दुकान का भी निर्माण कराया गया था ताकि शौचालय के बाहर दुकान चलानेवाले शौचालय की देखरेख कर सकेंगे. लेकिन, शौचालय बनने के बाद इसे नगर पर्षद को नहीं सौंपा गया.
इसके कारण कारण चारों शौचालय बेकार हो गये. जानकारी के अनुसार, शहर के सब्जी मंडी, नगर थाने के समीप, जिला पर्षद के समीप व प्रखंड कार्यालय पर शौचालय का निर्माण हुआ था. इसमें से सब्जी मंडी शौचालय में कुछ दिनो तक शौचालय के बनी दुकान में एक व्यवसायी द्वारा दुकान भी लगाया गया. इस दौरान शौचालय की देखरेख होती थी. लेकिन, किसी कारणवश से दुकान बंद हो गयी. इसके बाद देखरेख के अभाव में शौचालय बरबाद हो गया.
यात्रियों को हो रही परेशानी
शहर के रामाबांध बस स्टैंड, दानी बिगहा बस स्टैंड, रमेश चौक, गांधी मैदान, धर्मशाला मोड़ व जामा मसजिद के पास से खुलनेवाली गाड़ियों के यात्री को शौच व पेशाब के लिए परेशानी उठानी पड़ती है. शौचालय व पेशाब घर के अभाव में पुरुष यात्री तो खुले में पेशाब कर लेते हैं. लेकिन, महिला यात्रियों को शर्मसार होना पड़ता है.

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