एक साथ रोया पूरा गांव

– हर कोई कर रहा जघन्य हत्याकांड की निंदा – बूढ़ी नाले पर दी गयी सातों को मुखाग्नि – गांव की गलियों से रोते हुए श्मशान घाट पहुंचे परिजन व गांववाले औरंगाबाद (ग्रामीण) : औरंगाबाद जिले के पिसाय गांव में 17 अक्तूबर को जो घटना हुई, वह अपने आप में हृदयविदारक है. हर कोई इस […]

– हर कोई कर रहा जघन्य हत्याकांड की निंदा

– बूढ़ी नाले पर दी गयी सातों को मुखाग्नि

– गांव की गलियों से रोते हुए श्मशान घाट पहुंचे परिजन गांववाले

औरंगाबाद (ग्रामीण) : औरंगाबाद जिले के पिसाय गांव में 17 अक्तूबर को जो घटना हुई, वह अपने आप में हृदयविदारक है. हर कोई इस जघन्य हत्याकांड की निंदा कर रहा है. बुधवार की शाम हुए हमले में इस गांव ने अपने सात बेटे खो दिये. किसी का सुहाग उजड़ा, किसी के सिर से पिता का साया उठा, तो किसी का बेटा मारा गया.

अपनों को खोने के गम में पूरा गांव गमगीन है. रो रहा है. गांववालों का यह दर्द तब और बढ़ गया, जब शुक्रवार की रात गांव के उन्होंने सातसात अपनों को अंतिम विदाई दी.

शुक्रवार की मध्य रात्रि पिसाय गांव में जिला पार्षद शोभा देवी के पति सुशील पांडेय, पप्पू पांडेय, रामसुभग पांडेय, राम प्रवेश पांडेय, योगेंद्र पांडेय, रामवल्लभ उपाध्याय मनीष पांडेय की चिताएं श्मशान घाट के लिए एक साथ निकलीं. इस दौरान हर कोई सकते था. पूरा गांव एक साथ रो पड़ा. वहां मौजूद हर किसी की आंखों में आंसू थे. मृतकों के परिजनों समेत पूरे गांववासियों का बुरा हाल था. बाहर से आये परिजन भी बेहाल थे.

सभी गांव की गलियों से लेकर श्मशान घाट तक रोते हुए पहुंचे. इस बीच सांत्वना देने वालों की भी कोई कमी नहीं थी. लेकिन, अब इसका कोई काम नहीं रह गया था. बूढ़ी नाले पर सभी को मुखाग्नि दी गयी.

पिता पर था गुमान : विक्की

अपने पिता सुशील पांडेय के शव को मुखाग्नि देते हुए विक्की कुमार फफक पड़ा. रोते हुए उसने कहा, बड़ा गुमान था अपने बाप पर. उन्होंने पढ़ाई के लिए मुझे दिल्ली भेजा था. इसलिए कि बेटा बाप का नाम रोशन करेगा. लेकिन, वह तो हमें बीच मजधार में ही छोड़ कर हमेशा के लिए चले गये. लेकिन, उनके सपने अधूरे नहीं रहेंगे.

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