गोपालगंज : दहेज के लिए पत्नी की जहर देकर हत्या किये जाने के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र कुमार की कोर्ट ने शुक्रवार को दोषी मृत महिला के पति को सजा-ए-मौत सुनायी.
वहीं, गोतनी को उम्रैकद और 50 हजार रुपये का अर्थदंड देने का फैसला सुनाया है. दहेज के लिए हत्या किये जाने के मामले में गोपालगंज की कोर्ट का यह पहला ऐतिहासिक फैसला है. एपीपी सुरेंद्र द्विवेदी ने बताया कि थावे थाना क्षेत्र के हरदिया गांव के नसरुद्दीन अहमद की शादी 10 अगस्त, 2002 को मांझा थाना क्षेत्र के दुलदुलिया निवासी अब्दुल जब्बार की पुत्री संजीदा खातून के साथ हुई थी.
शादी के बाद दहेज की मांग को लेकर संजीदा को ससुरालियों द्वारा प्रताड़ित किया जाने लगा. प्रताड़ित करने के बाद 21 मार्च, 2007 को जहर (सल्फास) देकर हत्या कर दी गयी. हत्या के बाद पुलिस से बचने के लिए साक्ष्य को मिटाने की कोशिश करते हुए शव को दफना दिया गया.
इस मामले को लेकर थावे थाने में मृतका के पिता ने हत्या की प्राथमिकी दर्ज करायी, जिसमें मृतका के पति नसरुद्दीन अहमद, गोतनी सलामुन नेशा और उसके पति को अभियुक्त बनाया गया. मजिस्ट्रेट के आदेश पर वारदात के 15 दिनों बाद आरोपित के गांव में स्थित कब्र से शव को जांच के लिए बाहर निकाला गया. फॉरेंसिक जांच के बाद जहर देकर हत्या की पुष्टि हुई.
