अरवल में नई खाद वितरण व्यवस्था से किसानों में नाराजगी, कृषि विभाग ने बताया वैज्ञानिक फैसला

अरवल में धान रोपनी के मौसम में उर्वरक वितरण की नई सरकारी व्यवस्था किसानों के बीच चर्चा का विषय है. जिले में खाद की नई व्यवस्था लागू की गई है, जिसका उद्देश्य कालाबाजारी रोकना और सभी किसानों तक समान रूप से खाद पहुंचाना है.

अरवल में धान रोपनी के मौसम में अरवल जिले में उर्वरक वितरण की नई सरकारी व्यवस्था किसानों और खाद विक्रेताओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. जिला कृषि विभाग के निर्देशानुसार अब प्रति हेक्टेयर निर्धारित मात्रा के अनुसार ही किसानों को डीएपी और यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है. इस व्यवस्था का उद्देश्य उर्वरकों की कालाबाजारी पर रोक लगाना, सभी किसानों तक समान रूप से खाद उपलब्ध कराना और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना है.

निर्धारित मात्रा से अधिक खाद देने पर होगी कार्रवाई

सरकारी निर्देश के अनुसार जिले के सभी लाइसेंसधारी उर्वरक विक्रेता तय सीमा में ही खाद का वितरण कर रहे हैं. दुकानदारों का कहना है कि निर्धारित मात्रा से अधिक उर्वरक देने पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है. इसी वजह से सभी विक्रेता सरकार के निर्देशों का पालन कर रहे हैं.

कम खाद मिलने से किसान जता रहे चिंता

दूसरी ओर किसान पहले की तरह अधिक मात्रा में यूरिया और डीएपी की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि कम खाद मिलने से फसल का समुचित विकास प्रभावित हो सकता है और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. किसानों का यह भी कहना है कि हर साल खेती के मौसम में खाद की कमी हो जाती है. ऐसे में वे पहले से उर्वरकों का भंडारण करना चाहते हैं, लेकिन नई व्यवस्था के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है.

कृषि विभाग ने वैज्ञानिक आधार पर लिया फैसला

जिला कृषि पदाधिकारी अरविंद कुमार झा ने बताया कि नई व्यवस्था वैज्ञानिक अनुसंधान और मृदा स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लागू की गई है. उन्होंने कहा कि धान की एक हेक्टेयर खेती के लिए तीन बोरी यूरिया और डेढ़ बोरी डीएपी पर्याप्त मानी गई है. आवश्यकता से अधिक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग मिट्टी की उर्वरा शक्ति को प्रभावित करता है और लंबे समय में उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर डालता है.

जरूरत के अनुसार अतिरिक्त खाद भी मिलेगी

जिला कृषि पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिले में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और सभी किसानों को निर्धारित मानकों के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जा रही है. यदि किसी किसान के पास अधिक कृषि भूमि है तो भूमि संबंधी प्रमाण प्रस्तुत करने पर नियमानुसार अतिरिक्त उर्वरक भी उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने किसानों से अनावश्यक भंडारण से बचने और संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग कर वैज्ञानिक खेती अपनाने की अपील की.

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