ऊर्जा को बढ़ाने के लिए शोध की जरूरत

फुलवारीशरीफ : बिहार सरकार के ऊर्जा एवं वाणिज्य कर मंत्री िवजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा की किसी भी देश के विकास के लिए ऊर्जा का क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. ऊर्जा का स्रोत बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर शोध करने की जरूरत पर बल देते हुए देश-विदेश आये वैज्ञानिकों से आह्वान किया की […]

फुलवारीशरीफ : बिहार सरकार के ऊर्जा एवं वाणिज्य कर मंत्री िवजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा की किसी भी देश के विकास के लिए ऊर्जा का क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. ऊर्जा का स्रोत बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर शोध करने की जरूरत पर बल देते हुए देश-विदेश आये वैज्ञानिकों से आह्वान किया की कोई ऐसी नयी तकनीक का इजाद करें,

जिससे ऊर्जा की उपलब्धता को बढ़ायी जा सकी और उससे मानव जीवन और कृषि पर कोई खराब प्रभाव न पड़े. यादव सोमवार को बामेती परिसर में 11वीं एशिया पेसिफिक कमेटी ऑन सस्टेनेबल इनर्जी एंड इन्वायरमेंट टेक्नोलॉजी पर आयोजित तीन दिवसीय सेमिनार के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि देश में नब्बे प्रतिशत ऊर्जा का उत्पादन कोयला के द्वारा किया जा रहा है, जो सबसे ज्यादा प्रदूषण का कारण बनता जा रहा है.

बिहार में कोयला का स्रोत भी झारखंड बंटवारे के बाद समाप्त हो गया है. वातावरण में कार्बन डाइऑसाइड की मात्रा बढ़ती जा रही है. वैज्ञानिकों को इस समस्या से निजात के लिए कोई नयी तकनीक का इजाद करना चाहिए.उन्होंने कहा की कहा की ऊर्जा के तीन स्रोत हैं, जल पवन और सूर्य. जल और सूर्य की ऊर्जा सभी जगह उपलब्ध है, लेकिन पवन ऊर्जा के विकास के लिए बिहार में जमीन की किल्लत है. इसके लिए सरकार अपने स्तर से प्रयास कर रही है और आने वाले समय में जमीन की किल्लत को दूर कर पवन ऊर्जा के विकास की राह आसान की जायेगी. सीकेई विश्वविद्यालय जापान से आये प्रो तोशीनोरीकोजिमा ने कहा की बंजर भूमि को हरा भरा बनाने में ऊर्जा की अहम भूमिका होती है. सियोल विश्वविद्यालय दक्षिण कोरिया से आये वैज्ञानिक किम एचके ने गंदे पानी और कचरे को रिसाइक्लीन करके किस तरह से इस्तेमाल में लाया जा सकता है. इस पर अपना विचार व्यक्त किया. अरावली प्रबंधन संस्थान जोधपुर के निदेशक वरुण आर्या ने भी अपने विचार व्यक्त किये. इसके अलावा चीन से आये यूनान विश्वविद्यालय ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के प्रो मिनछियांग, अमेरिका से आये डॉ ओमानन

के वर्गीस आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये.
कार्यक्रम की अध्यक्षता बीआर आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर की प्रो संगीता सिन्हा ने की.

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