उपेक्षा. अब तक नहीं बना वंशी प्रखंड का भवन
भवन निर्माण के लिए कई किसानों ने दी अपनी जमीन
वंशी (अरवल) : स्थापना के 22 वर्ष बीतने के बाद भी सोनभद्र वंशी सुर्यपूर प्रखंड कार्यालय का अपना भवन नहीं बन सका, जबकि स्थानीय किसानों ने भवन निर्माण के लिए अपनी उपजाऊ भूमि तक रजिस्ट्री कर दी. अपना भवन नहीं रहने के कारण वंशी गांव स्थित पुनपुन नदी के किनारे पर बने जर्जर सामुदायिक भवन में प्रखंड कार्यालय चलाया जा रहा है. सामुदायिक भवन जर्जर रहने व आवास की व्यवस्था नहीं रहने के कारण अधिकतर अधिकारियों व कर्मियों का आवास करपी में है और वे वहीं से कार्यालय के कार्यों का निबटारा करते हैं. इससे वंशी प्रखंड के लोगों को अपने काम के लिए कोसों लंबी पैदल यात्रा कर करपी जाने की विवशता बनी रहती है.
प्रखंड प्रमुख सह राजद के वंशी प्रखंड अध्यक्ष महाराणा सिंह यादव ने प्रेस बयान जारी कर सरकार व जिला प्रशासन से भवन निर्माण कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि वंशी सुर्यपुर को प्रखंड का दर्जा मिलने के बाद तुर्क तेलपा, कोनी, राधे नगर, खटांगी, मंझियामा, ओढ़ बिगहा, वंशी, सोनभद्र समेत अन्य गांवों के लोगों को खुशी हुई थी कि अब कोसों दूरी तय कर करपी जाने से मुक्ति मिलेगी, परंतु 22 वर्ष बाद भी स्थिति नहीं बदली. भवन के अभाव में बीडीओ, सीओ, बीइओ, पंचायत सेवक, राजस्व कर्मचारी अपना डेरा करपी में ही जमाये हुए हैं व कार्यालय न के बराबर ही आते हैं. इससे प्रखंड के लोगों को दाखिल खारिज समेत अन्य कार्यों के लिए आज भी करपी जाना पड़ता है. उन्होंने बताया कि प्रखंड कार्यालय के भवन के निर्माण के लिए वंशी गांव के कई किसानों ने अपनी उपजाऊ जमीन को रजिस्ट्री कर दी, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण के कारण भवन का निर्माण नहीं हो सका और उक्त जमीन पर किसानों का ही कब्जा है. उक्त जमीन में आज भी किसान धान समेत अन्य फसलें उगा रहे हैं. उन्होंने बताया कि प्रखंड के सुदूर गांवों में आज भी नाली, गली, पेयजल, आवागमन, बिजली, शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याएं बनी हुई हैं.
कार्यालय में नहीं मिलते अधिकारी व कर्मी
प्रखंड कार्यालय में पदाधिकारियों व कर्मचारियों की स्थिति 12 बजे तक लेट नहीं और दो बजे के बाद भेंट नहीं वाली बनी हुई है. कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने डीएम से प्रखंड में ससमय पदाधिकारियों व कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने की मांग की थी, इस पर आश्वासन भी मिला था, लेकिन इस दिशा में आज तक कोई कारगर कार्रवाई नहीं की गयी.
