करपी (अरवल) : आज विश्व पर्यावरण दिवस है. पर्यावरण आज मनुष्य की सर्वाधिक जरूरतों में एक है. वैसे तो पर्यावरण में प्रदूषण कई कारणों से हो रहा है, लेकिन इनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारण वृक्षों की धड़ल्ले से हो रही कटाई है. करपी एवं वंशी प्रखंडों में जिस तेजी के साथ हरे वृक्षों की कटाई हो रही है उस पर अतिशीघ्र लगाम नहीं लगायी गयी,
तो वह दिन दूर नहीं होगा जब इस क्षेत्र में वृक्ष देखने को भी नहीं मिलेंगे. समाजसेवी पुण्य देव सिंह ने बताया कि शहर तेलपा, करपी, खजूरी, देवकुंड आदि कई गांवों में हरे वृक्षों की भरमार थी, लेकिन इनकी तेजी से कटाई हुई. उसके बाद उनके स्थान पर नये पौधे नहीं लगाये गये. पौधारोपण के नाम पर खानापूरी की गयी. पौधे लगाये गये और कुछ ही दिन के बाद सूख भी गये. और-तो-और प्रखंड कार्यालय परिसर से काफी संख्या में हरे वृक्षों की कटाई अधिकारियों की नाक के नीचे कर दी गयी,
लेकिन किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गयी. हाल ही में एक मामला दृष्टिगोचर हुआ था जब एक साथ दिन के उजाले में प्रखंड कार्यालय परिसर से पांच हरे वृक्षों की कटाई कर दी गयी. इसमें दोषी पकड़े नहीं जा सके हैं. इसके अतिरिक्त करपी एवं वंशी प्रखंडों में दर्जनों अवैध आरा मशीनों का संचालन किया जा रहा है. शहर तेलपा-करपी पथ में सड़क के किनारे कई अवैध आरा मशीनों का संचालन किया जा रहा है. इसके अतिरिक्त करपी थाना मुख्यालय के पीछे एवं करपी-वंशी मुख्य पथ के किनारे भी कई आरा मशीन संचालित है. रामापुर, करपी, इमामगंज शांतिपुरम बाजारों में सड़क के किनारे ही बेखौफ होकर अवैध आरा मशीनों का संचालन किया जा रहा है. इन अवैध आरा मशीनों के संचालन पर रोक लगाने के लिए किसी प्रकार के प्रयास नहीं किया जा रहे हैं.
