आरा : कोईलवर में सड़क हादसे में दो लोगों की मौत, पांच गंभीर घायल; परिवारों में पसरा मातम

कौइलवर में मजदूरी कर लौट रहे सात मजदूरों की सड़क दुर्घटना में मौत और गंभीर चोटों से पूरा इलाका सदमे में है. दो परिवारों पर विपत्ति का पहाड़ टूटा है, वहीं रोजी-रोटी और बेटियों की शादी की चिंता सता रही है.

Koilwar Road Accident : मजदूरी कर ऑटो से घर लौट रहे सात मजदूरों में पांच के सड़क दुर्घटना में बुरी तरह जख्मी और दो की दर्दनाक मौत पर पूरे कोईलवर में मातम पसर गया है. दोनों मृतकों के इस असामयिक दर्दनाक मौत के बाद दोनों परिवारों पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा है.

दोपहर बाद मजदूरी करने निकले मजदूरों के घर पर उनका इंतजार कर रहे परिजनों को जब देर रात उनके सड़क दुर्घटना में बुरी तरह जख्मी होने की सूचना पहुंची तो चीख-पुकार मच गई. जिसे जहां खबर मिली दौड़ता-भागता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोईलवर पहुंचा. जहां परिजनों के रोने चिल्लाने और चीख पुकार से माहौल गमगीन हो गया था.

अस्पताल में अफरा-तफरी और घायलों को रेफर

खबर सुन कर दौड़े भागे अस्पताल पहुंचे लोगों द्वारा आनन फानन में सबको रेफर करा कर आरा से पटना तक के अस्पतालों में भर्ती कराया गया. इलाज के लिये ले जाते समय ही एक मजदूर की मौत हो गयी जबकि एक की मौत दुर्घटनास्थल पर ही हो गयी. मृतकों में शामिल मो. सगीर और मो. अलीम के घर मातम पसर गया. चेहल्लुम की तैयारियों में जुटे परिवार में मौत के बाद मातम हो गया.

मो. सगीर के परिवार में कोहराम और रोते-बिलखते परिजन

मो. सगीर की पत्नी चांदनी बेगम, दोनों बेटे साज़िद और शाहनवाज, बेटियां साहिबा और सबा सगीर के सड़क दुर्घटना में जख्मी होने की सूचना पर जब दौड़े भागे अस्पताल पहुंचे तो वहां सगीर के शव को देखते ही चीखकर रोने लगे. बेटियां पिता के शव से लिपटकर रो रही थीं, पत्नी चांदनी को मुहल्ले की औरतें ढांढस बंधा रही थीं लेकिन वह लगातार रोती-बिलखती एक ही बात रट रही थी कि अब उनका और उनके बच्चों की चिंता कौन करेगा.

मो. अलीम की रास्ते में मौत और बच्चों का विलाप

इधर इलाज के लिए ले जाये जाने के क्रम में अलीम की भी मौत हो गई. अलीम की पत्नी शहजाद और उनकी पांचों बेटियां, दोनों बेटे भी दौड़ते भागते अस्पताल पहुंचे थे.

बुरी तरह जख्मी अलीम को आनन फानन में पटना रेफर किया गया लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया. अहले सुबह जब दोनों का शव घर आया तो अलीम की पांचो बेटियां गुलाफ्शां, नेहा, हेना, सुहाना और शमा पिता से लिपटकर बिलख पड़ीं.

वहीं बेटे दानिश और अरशद पिता की मौत से स्तब्ध और खामोश थे. वे कभी पिता को देखते, कभी बहनों को चुप कराते तो कभी मां को ढांढस बंधाते.

परिवारों के समक्ष रोजी-रोटी और बेटियों की शादी की समस्या

दोनों की मौत के बाद दोनों के घर में अब कोई कमाऊ सदस्य नहीं बचा है. दोनों परिवारों के समक्ष रोजी-रोटी और बेटियों की शादी की समस्या सामने आ पड़ी है.

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By Deepak kumar gupt

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