स्वच्छता मिशन पर सवाल : लाखों खर्च के बाद भी बेकार पड़े चलंत शौचालय

Arrah News : नगर निगम लाखों रुपए खर्च करके 20 चलंत शौचालय खरीदी थी. लेकिन देखरेख के अभाव में यह चलंत शौचालय उपयोग में नहीं है.

Arrah News : (नरेन्द्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट)

नगर निगम द्वारा आम जनता की सुविधा के लिए खरीदे गए चलंत शौचालयों का लाभ लोगों को अब तक नहीं मिल पा रहा है. रखरखाव और नियमित देखरेख के अभाव में ये शौचालय केवल शोपीस बनकर रह गए हैं.

मरम्मत के बाद भी स्थिति जस की तस

सूत्रों के अनुसार, कई बार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद नगर निगम ने दो चलंत शौचालयों की मरम्मत तो कराई, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ. पानी की टंकी में नियमित रूप से पानी नहीं भरे जाने के कारण इनका उपयोग प्रभावित हो रहा है.

लाखों की लागत पर सवाल

नगर निगम की लापरवाही के कारण लाखों रुपये की लागत से खरीदे गए ये शौचालय बेकार साबित हो रहे हैं. शुरुआत में इन्हें सड़कों के किनारे खड़ा कर दिया गया, लेकिन उचित देखरेख और संचालन व्यवस्था न होने से इनका उद्देश्य पूरा नहीं हो सका.

स्वच्छता अभियान की मंशा पर असर

केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान, नमामि गंगे और राज्य सरकार के लोहिया स्वच्छ मिशन के तहत स्वच्छता व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से इन चलंत शौचालयों की खरीद की गई थी. लेकिन उचित संचालन के अभाव में ये शौचालय गंदगी से बचाव की बजाय स्वयं गंदगी का कारण बनते नजर आ रहे हैं.

20 चलंत शौचालयों की हुई थी खरीदारी

जानकारी के अनुसार, नगर निगम द्वारा कुल 20 चलंत शौचालयों की खरीद की गई थी, ताकि इन्हें सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की सुविधा के लिए लगाया जा सके. लेकिन देखरेख और संचालन व्यवस्था की कमी के कारण यह योजना प्रभावी नहीं हो सकी.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर नियमित रखरखाव और संचालन सुनिश्चित किया जाए तो इन शौचालयों का लाभ आम जनता को मिल सकता है, अन्यथा यह सरकारी धन की बर्बादी का उदाहरण बनकर रह जाएगा.

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By Rajeev Kumar

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मूल रूप से बिहार के पूर्वी चंपारण के बाबा सोमेश्वरनाथ नगरी रहने वाले राजीव कुमार ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में पारास्नातक की डिग्री हासिल किया. काम करने के दौरान बेतहर हेडिंग और एनओडी पैकेज पर दो-दो पुरस्कार प्राप्त है.

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