आरा जंक्शन पर कैसे डिरेल हुई थी सिक्किम-महानंदा एक्सप्रेस, जांच रिपोर्ट में खुलासा, 250 मीटर आगे बढ़ी ट्रेन फिर...

Arrah Mahananda Express : आरा जंक्शन पर महानंदा एक्सप्रेस के डिरेलमेंट की संयुक्त जांच रिपोर्ट में लोको पायलट और सहायक लोको पायलट को हादसे का जिम्मेदार ठहराया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, स्टार्टर सिग्नल S-5 को खतरे की स्थिति में पार करने के बाद ट्रेन को पीछे करने के दौरान यह दुर्घटना हुई.

Arrah Mahananda Express : आरा जंक्शन पर छह सितंबर की सुबह ट्रेन संख्या 15483 महानंदा एक्सप्रेस के डिरेलमेंट मामले की संयुक्त जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आये हैं. जांच रिपोर्ट के अनुसार ट्रेन के स्टार्टर सिग्नल S-5 को खतरे की स्थिति में पार करने के बाद ट्रेन को पीछे किया गया था. इसी दौरान ट्रैप प्वाइंट नंबर 85 पर ट्रेन के पहिए पटरी से उतर गये. संयुक्त जांच रिपोर्ट में हादसे के लिए ट्रेन के लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की भूमिका को जिम्मेदार बताया गया है.

250 मीटर आगे निकल गयी थी ट्रेन

जांच रिपोर्ट के अनुसार ट्रेन संख्या 15483 लोको नंबर 39525 WAP-7/GZB के साथ सुबह 3:53 बजे आरा जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या दो स्थित लाइन नंबर चार पर पहुंची थी. इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात स्टेशन मास्टर ने दूसरी ट्रेन संख्या 22587 के लिए मेन लाइन से सिग्नल कमांड दिया.

स्टार्टर सिग्नल S-5 को खतरे की स्थिति में पार किया

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेन 15483 के क्रू को उचित डिपार्चर सिग्नल नहीं मिलने के बावजूद ट्रेन करीब 250 मीटर आगे बढ़ गयी और ट्रैप प्वाइंट नंबर 85 को पार कर गयी. बाद में क्रू को स्थिति का एहसास हुआ और ट्रेन को पीछे की ओर किया गया. इसी पुश बैक के दौरान ट्रैप प्वाइंट नंबर 85 पर ट्रेन के पहिए पटरी से उतर गये.

जांच रिपोर्ट

SPAD को हादसे का प्रमुख कारण बताया

संयुक्त जांच में स्टार्टर सिग्नल S-5 को खतरे की स्थिति में पार करना यानी SPAD हादसे का प्रमुख कारण बताया गया है. रिपोर्ट में इसके बाद ट्रेन को पुश बैक किये जाने के दौरान डिरेलमेंट होने की बात कही गयी है.

दो कोचों के पहिए हुए डिरेल

जांच में ट्रेन के दो कोचों के पहिए पटरी से उतरने की बात सामने आयी है. कोच NF/LWFAC 223817 के दो पहिए और WC/LSLRD 215647 के तीन पहिए डिरेल हुए थे. हादसे के बाद दोनों प्रभावित कोचों को ट्रेन से अलग कर दिया गया.

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सुबह 5:35 बजे अलग किये गये प्रभावित कोच

दोनों प्रभावित कोचों को सुबह 5:35 बजे ट्रेन से अलग करने की कार्रवाई पूरी की गयी. इसके बाद शेष 21 कोचों को दूसरे इंजन के साथ आगे भेजने की अनुमति दी गयी. ट्रेन सुबह 7:30 बजे लाइन नंबर तीन से वैध BPC के साथ रवाना हुई.

सिग्नल की दृश्यता जांच में स्पष्ट मिली

संयुक्त जांच के दौरान स्टार्टर सिग्नल S-5 की इंजन स्टॉप बोर्ड से दूरी 163.10 मीटर पायी गयी. जांच टीम ने सिग्नल की दृश्यता को बहुत अच्छी और स्पष्ट बताया है. इससे सिग्नल की स्थिति को लेकर भी जांच में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आयी.

ट्रैप प्वाइंट पर मिले ताजा फ्लैंगल मार्क

जांच टीम ने ट्रैप प्वाइंट नंबर 85 को साइट और पैनल पर सही स्थिति में तथा OPEN TRAP की स्थिति में पाया. प्वाइंट की ड्राइविंग रॉड, लॉकिंग रॉड और इंडिकेशन रॉड में मोड़ पाया गया. वहीं टंग रेल पर ताजा फ्लैंगल मार्क तथा स्टॉक रेल और टंग रेल के बीच ब्लॉक का निशान भी मिला.

चार से नौ बजे तक तीन लाइनें रहीं ब्लॉक

घटना की सूचना के बाद SPARMV को सुबह 4:15 बजे बुलाया गया, जो 5:40 बजे घटनास्थल पहुंचा. वहीं ART/DNR को सुबह 4:17 बजे बुलाया गया और वह 6:46 बजे घटनास्थल पहुंचा. घटना के कारण ट्रेन संख्या 15483 आरा में विलंबित हुई. इसके अलावा लाइन संख्या 4, 5 और 6 को सुबह चार बजे से नौ बजे तक ब्लॉक रखा गया.

लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की भूमिका पर सवाल

संयुक्त जांच रिपोर्ट में हादसे का कारण लाइन नंबर चार के स्टार्टर S-5 को SPAD करने और उसके बाद ट्रेन को पुश बैक करने के दौरान डिरेलमेंट बताया गया है. रिपोर्ट में ट्रेन संख्या 15483 के लोको पायलट और सहायक लोको पायलट को जिम्मेदार ठहराया गया है.

जांच दस्तावेजों में कई रिपोर्ट शामिल

मामले की जांच से संबंधित डेटा लॉगर रिपोर्ट, BA टेस्ट रिपोर्ट, क्रू के बयान, लोको की स्पीड चार्ट और सिग्नल की विजिबिलिटी चेक रिपोर्ट को भी जांच के दस्तावेजों में शामिल किया गया है. इन दस्तावेजों के आधार पर घटना की परिस्थितियों और क्रू की भूमिका का आकलन किया गया है.

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By दीपक कुमार गुप्ता

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