Bakhorapur Temple: बड़हरा प्रखंड अंतर्गत भव्य मां काली बखोरापुरवाली के महोत्सव से जुड़ी बजट रिपोर्ट करीब दो माह से लंबित रहने का मामला अब मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है. ट्रस्ट के कार्यकारी अवैतनिक मुख्य संरक्षक सुनील कुमार सिंह गोपाल ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को आवेदन भेजकर बड़हरा अंचलाधिकारी अंशू प्रसून और बड़ा बाबू मो. असलम की कार्यशैली की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. आवेदन में रिपोर्ट भेजने में कथित देरी, रिश्वत मांगने, विभागीय निर्देशों की अनदेखी और धार्मिक भेदभाव सहित कई आरोप लगाये गये हैं.
25 जुलाई को भेजा गया था रिपोर्ट तैयार करने का पत्र
ट्रस्ट के अनुसार, भोजपुर जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से डिस्पैच संख्या 2322, दिनांक 25 जुलाई 2026 को बखोरापुर महोत्सव के बजट से संबंधित रिपोर्ट तैयार कर भेजने के लिए बड़हरा अंचल कार्यालय को पत्र भेजा गया था. ट्रस्ट का आरोप है कि निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद 19 सितंबर तक रिपोर्ट जिलाधिकारी कार्यालय को नहीं भेजी गयी.
बार-बार आश्वासन के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
ट्रस्ट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण तिवारी ने बताया कि रिपोर्ट से संबंधित कार्य के सिलसिले में उन्होंने अंचलाधिकारी से कई बार मुलाकात की. उनके अनुसार, मुलाकात के दौरान काम जल्द कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन इसके बावजूद रिपोर्ट तैयार कर भेजने की कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने अंचल कार्यालय में एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ कथित तौर पर उचित व्यवहार नहीं किये जाने का भी आरोप लगाया.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में 50 हजार रुपये मांगने का आरोप
रविवार को बखोरापुर काली मंदिर परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के सवाल पर सुनील कुमार सिंह गोपाल ने आरोप लगाया कि काम के एवज में अंचलाधिकारी की ओर से 50 हजार रुपये की कथित मांग की गयी थी. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोप सही पाये जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. हालांकि, रिश्वत मांगने और धार्मिक भेदभाव से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
तीन प्रमुख आयोजनों की तैयारियों पर असर की चिंता
ट्रस्ट ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में बखोरापुर मंदिर परिसर में दुर्गापूजा, महापर्व छठ और नववर्ष महोत्सव सहित कई महत्वपूर्ण आयोजन होने हैं. ऐसे में बजट रिपोर्ट के लंबित रहने से इन आयोजनों की प्रशासनिक एवं वित्तीय तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका जतायी गयी है.
इधर, बड़हरा अंचलाधिकारी की कार्यशैली को लेकर मुखिया संघ, भोजपुर के प्रतिनिधियों ने भी शनिवार की शाम जिलाधिकारी मनेश कुमार मीणा से मुलाकात कर शिकायत की है. इससे अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा हो रही है.
21 स्थानों पर भेजी गयी आवेदन की प्रतिलिपि
ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि मुख्यमंत्री को भेजे गये आवेदन की प्रतिलिपि करीब 21 स्थानों पर भेजी गयी है. इनमें जिलाधिकारी भोजपुर, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार विधानसभा अध्यक्ष, बिहार विधान परिषद के सभापति, बिहार मानवाधिकार आयोग, बिहार धार्मिक न्यास पर्षद, निगरानी विभाग और आर्थिक अपराध इकाई समेत अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं.
सीओ का पक्ष नहीं मिल सका
इस संबंध में अंचलाधिकारी अंशू प्रसून का पक्ष जानने के लिए दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया. खबर लिखे जाने तक उनका पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका.
