आरा में गुरु पर्व के अवसर पर भोजपुर के कला साधकों ने गुरु बक्शी विकास के नेतृत्व में नृत्य सम्राट पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज का गुरु पूजन किया. इस अवसर पर महाराज जी के कथक के क्षेत्र में दिए गए योगदान को याद करते हुए बिरजू महाराज स्तुति परण से मंगलाचरण किया.
गुरु-शिष्य परंपरा एक प्राचीन शिक्षा पद्धति है. यह केवल ज्ञान के आदान-प्रदान तक ही सीमित नहीं है. इस परंपरा में संस्कार महत्वपूर्ण हैं.
भारतीय संगीत जगत में आज भी इसकी महत्ता कायम है. उक्त बातें कथक गुरु बक्शी विकास ने शिवादी क्लासिक सेंटर ऑफ आर्ट एंड म्यूजिक में आयोजित गुरु-शिष्य महापर्व के अवसर पर कहीं.
वैदिक परंपरा से हुआ गुरु पूजन और गंडाबंधन
आश्रम में सर्वप्रथम गायन विधा के शिष्यों व शिष्याओं ने शास्त्रीय संगीत की विदुषी बिमला देवी का वैदिक परंपरा से गुरु पूजन किया. बिमला देवी ने सभी शिष्यों का गंडाबंधन किया.
वहीं नृत्य एवं तालवाद्य के शिष्यों-शिष्याओं ने गुरु बक्शी विकास एवं गुरु आदित्या का वैदिक पूजन करते हुए माल्यार्पण किया एवं पुष्प वर्षा की. सभी शिष्यों का गंडाबंधन करते हुए गुरु एवं शिष्यों ने कला की सेवा के प्रति निष्ठा एवं समर्पण का संकल्प लिया.
शिष्यों और कलाकारों की प्रस्तुतियां
इस अवसर पर कलाकारों ने गायन, वादन एवं नृत्य की प्रस्तुति से अपने गुरुजनों को नमन किया. इस अवसर पर शिष्यों में श्री राजा कुमार ने कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा का भाव ही शिष्य को महान बनाता है.
वहीं अमित कुमार ने कहा कि गुरु की कृपा के बिना मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती. कथक नृत्यांगना सोनम शांडिल्य ने कहा कि गुरु के मुख से निकला वाक्य ही शिष्य का मूल मंत्र होता है.
भजन और कथक नृत्य की प्रस्तुतियां
श्रेया पांडेय, अजीत पांडेय, रोहित कुमार, आरोही, चांदनी, आकांक्षा, सागर, अमित, माही, नीतीश ने भजन के माध्यम से गुरु महिमा का बखान किया. स्नेहा पांडेय, राका श्रीवास्तव व सिद्धि आनंद ने मनमोहक कथक नृत्य प्रस्तुत किया.
Also Read : नालंदा : सावन में भगवान शिव पर चढ़े बेलपत्र और फूलों से बनेगी जैविक खाद, राजगीर में शुरू हुआ अभियान
