भोजपुर : बारिश नहीं होने से नलकूप के सहारे धान बचा रहे किसान, शाहपुर में बढ़ा सिंचाई का संकट

शाहपुर प्रखंड में सावन के महीने में भी बारिश न होने से सूखे जैसे हालात बन गए हैं. किसान नलकूपों के सहारे धान की फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अघोषित बिजली कटौती ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है. खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं.

Shahpur Farmers Irrigation : "दिन बादर, रात निबादर, पुरवा बहे झाबर-झाबर. कहे घाघ घाघिन से, एक दिन ऐसा होनी होई, इनार के पानी से धोबी कपड़ा धोई." भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों यह कहावत सटीक बैठ रही है. क्योंकि क्षेत्र में इन दिनों दिनभर बादलों की आवाजाही देखी जा रही है. लेकिन बारिश होने का नामोनिशान नहीं है.

कृषि के क्षेत्र में मशहूर कृषि वैज्ञानिक कवि घाघ और उनकी पत्नी घाघिन से कही गई इस कविता का भावार्थ है कि सावन महीने में दिन में आकाश में बादल दिखें और रात में आकाश में बादल न दिखें और पुरवा हवा चल रही हो, तो आने वाले निकट भविष्य में नदी-नाला सब सूखे रहेंगे, जिसके कारण कपड़ा धोने के लिए इनार (कुआं) के पानी से धोबी लोग कपड़ा धोएंगे.

सावन के महीने में भी बारिश नहीं होने से शाहपुर प्रखंड के शाहपुर सहित विभिन्न पंचायतों समेत आसपास के गांवों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं. धान की फसल पर संकट गहराने लगा है. खेतों की मिट्टी पूरी तरह सूख चुकी है और कई जगहों पर गहरी दरारें उभर आई हैं. किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की फसल को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा.

सिंचाई की समस्या और अघोषित बिजली कटौती से बढ़ी परेशानी

बारिश की कमी के कारण किसान नलकूप के सहारे खेतों की सिंचाई करने को मजबूर हैं. लेकिन सिंचाई के कुछ घंटे बाद ही खेत दोबारा सूख जा रहे हैं. तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण मिट्टी में नमी टिक नहीं रही है. इससे किसानों को बार-बार पानी पटाना पड़ रहा है, जिससे लागत लगातार बढ़ती जा रही है.

Also Read : आरा में स्कूल वैन हादसा, प्री-प्राइमरी के मासूमों से भरी वैन को ट्रक ने मारी टक्कर, कई बच्चे घायल

दूसरी ओर शाहपुर व करनामेपुर कृषि फीडर से हो रही अघोषित बिजली कटौती ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है. बिजली आने का कोई निश्चित समय नहीं होने से किसान दिन-रात खेतों में इंतजार कर रहे हैं.

जैसे ही बिजली की आपूर्ति होती है, किसान नलकूप चालू कर फसल बचाने में जुट जाते हैं. कई किसानों की रातें खेतों में ही गुजर रही हैं.

किसानों का आर्थिक बोझ और प्रशासन से राहत की मांग

किसानों का कहना है कि इस बार धान की खेती में जुताई, रोपाई, डीजल, खाद और मजदूरी पर पहले ही भारी खर्च हो चुका है. अब लगातार सिंचाई की मजबूरी ने आर्थिक बोझ और बढ़ा दिया है.

Also Read : आरा में हजारों मवेशियों पर मंडरा रहा बरसाती बीमारियों का खतरा, टीकाकरण नहीं होने से पशुपालक चिंतित

कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ा संकट अपनी फसल को बचाने का है. पीड़ित किसानों ने प्रशासन से कृषि फीडर पर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और सूखे की स्थिति का सर्वे कर आवश्यक राहत देने की मांग की है.

किसानों का कहना है कि यदि मौसम और बिजली व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो इस वर्ष धान उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar news desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >