आरा में भोजपुरी पेंटिंग प्रदर्शनी का आयोजन, 40 कलाकृतियों ने दिखाई लोक संस्कृति की झलक

आरा के महंथ महिला महाविद्यालय में आयोजित भोजपुरी पेंटिंग सह सेमिनार में 40 से अधिक लोक कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गईं. इस प्रदर्शनी ने भोजपुर की समृद्ध संस्कृति और कला को जीवंत किया. अतिथियों ने कला की सराहना की और इसके विकास पर विचार-विमर्श किया.

Arrah Bhojpuri Painting Exhibition : आरा के महंथ महिला महाविद्यालय आरा के कला प्रेक्षागृह कला गैलरी में, भोजपुरी पेंटिंग सह सेमिनार का आयोजन हुआ. कला गैलरी में प्रदर्शित तकरीबन 40 चित्र और अलग-अलग लोक कलात्मक चीजें प्रदर्शित किया गया है जो काफी सृजनात्मक है.

भोजपुरी पेंटिंग भोजपुरिया संस्कृति से जुड़े लोक कला को एक साथ प्रदर्शित करना निश्चित रूप से भोजपुर की धरती पर गर्व महसूस करने जैसा है.

अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन और उद्घाटन

भोजपुरी पेंटिंग सह सेमिनार कार्यक्रम का उद्घाटन पद्मश्री श्याम शर्मा जी ने सभा में उपस्थित अशोक कुमार सिन्हा अपर निदेशक बिहार संग्रहालय पटना, पृथ्वीराज सिंह, बीरेंद्र कुमार सिंह, नरेंद्र प्रताप पालित प्राचार्य महंथ महिला महाविद्यालय आरा, पद्मश्री भीम सिंह भवेश, भाजपा नेता गुड्डू सिंह बबुआन, रालोमो प्रदेश सचिव सुनील पाठक आरा के संयुक्त उपस्थिति द्वारा किया गया. अतिथियों को अंगवस्त्र और भोजपुरी पेंटिंग एवं मोमेंटो से सम्मानित किया गया.

कलाविदों और विचारकों के संबोधन

भोजपुरी पेंटिंग प्रदर्शनी सह सेमिनार में उपस्थित कलाविदों कला समीक्षकों ने भोजपुरी चित्र शैली को लेकर काफी गहरी बातें कही. पद्मश्री श्याम शर्मा ने कहा कि भोजपुरी पेंटिंग को लेकर इसके विकास के क्रम को लेकर ढेरों ऐसे सुझाव दिए जो आने वाले समय में काफी मददगार साबित होगा.

वहीं मुख्य वक्ता पृथ्वीराज सिंह अपने संबोधन में कहा कि भोजपुरिया कला संस्कृति में सीधे जीवन दर्शन होता है. हम आने वाले समय को लेकर सजग रहें स्थानीय कला संस्कृति के लिए अनुकूल समय चल रहा है.

संबोधन क्रम को आगे बढ़ाते हुए बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा बोले यह शुरुआत है किसी भी कला को आगे बढ़ाने का. हम सभी अगर एकजुट होकर भोजपुरी कला संस्कृति पर इसी तरह विचार रखते रहे तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी.

संस्कृति के विकास और सरकारी कार्यालयों में स्थान पर चर्चा

वहीं बिरेंद्र कुमार सिंह सचिव बिहार कला मंच पटना अपने संबोधन में कहा कि भोजपुरिया संस्कृति समृद्ध रही है. कला संस्कृति का विकास तब संभव है जब स्थानीय लोग इसे स्वीकार कर अपने घरों में स्थान देना शुरू कर दें. हर सरकारी दफ्तर, हर जगह भोजपुरी चित्रों को जगह मिले तब सफलता मिलेगी.

प्रमाण पत्र वितरण और धन्यवाद ज्ञापन

अंत में सभी सम्मानित कलाकारों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ चित्रकार कमलेश कुंदन ने किया, बारी-बारी से सभी कलाकारों और सभी मंच पर उपस्थित आगंतुकों का धन्यवाद कर कार्यक्रम समापन की घोषणा की.

कलाकारों के साथ-साथ शहर के बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित थे जिसमें प्रमुख लोगों में भास्कर मिश्रा, संजय राय, सुरेश पांडेय, अनूप औलिक, सरियांश जी समेत कई लोग शामिल थे.

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By Rajnikant mishra

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