भोजपुर के बड़हरा प्रखंड अंतर्गत बबुरा गांव निवासी बिरबल कुशवाहा ने अंचलाधिकारी बड़हरा अंशु प्रसून पर दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के नाम पर 20 हजार रुपये रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगाया है. इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी भोजपुर एवं अपर समाहर्ता को अलग-अलग आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
हालांकि, अंचलाधिकारी ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार, मनगढ़ंत और तथ्यहीन बताते हुए खारिज कर दिया है.
शिकायतकर्ता का आरोप और दस्तावेजों की जांच
शिकायतकर्ता बिरबल कुशवाहा ने अपने आवेदन में कहा है कि उनकी पत्नी दुर्गावती देवी के नाम से दर्ज भूमि के दाखिल-खारिज से संबंधित वाद संख्या 912/2025-26 लंबित था. उनके अनुसार, 13 जुलाई 2026 को उन्हें बड़हरा अंचल कार्यालय बुलाया गया था, जहां अंचलाधिकारी ने जमीन से संबंधित मूल दस्तावेज, जमाबंदी, लगान रसीद, बंटवारा पत्र और वंशावली सहित सभी अभिलेखों की जांच की.
आरोप है कि इस दौरान अंचलाधिकारी ने अपने मोबाइल फोन से दस्तावेजों की तस्वीरें भी लीं और उनकी छायाप्रति अपने पास रख लीं. आवेदन में आरोप लगाया गया है कि दस्तावेजों की जांच के बाद कार्यालय के बाहर अंचलाधिकारी ने दाखिल-खारिज करने के एवज में 20 हजार रुपये की मांग की.
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने स्वयं को गरीब मजदूर बताते हुए इतनी राशि देने में असमर्थता जताई. आरोप है कि इसके बाद उन्हें डांटकर भगा दिया गया और बाद में उनका दाखिल-खारिज आवेदन अस्वीकृत कर दिया गया.
उच्चस्तरीय जांच की मांग और अंचलाधिकारी का पक्ष
बिरबल कुशवाहा ने अपने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि बड़हरा अंचल क्षेत्र में भूमि से जुड़े कई कार्य बिना रिश्वत के नहीं होते हैं. उन्होंने जिलाधिकारी और अपर समाहर्ता से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, जांच टीम गठित करने तथा आम लोगों के भूमि संबंधी कार्यों को पारदर्शी एवं रिश्वतमुक्त तरीके से कराने की मांग की है.
वहीं, बड़हरा अंचलाधिकारी अंशु प्रसून ने शिकायतकर्ता के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि संबंधित दाखिल-खारिज वाद में कर्मचारी नौशाद से यह पूछा गया था कि विक्रेता की जमाबंदी किस आधार पर सृजित की गई है और उससे संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया था.
आवश्यक अभिलेख और संतोषजनक जवाब उपलब्ध नहीं होने के कारण नियमानुसार आवेदन अस्वीकृत किया गया.
सीओ का दावा और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
अंचलाधिकारी ने कहा कि यदि उनके स्तर से आवेदन अस्वीकृत हुआ था, तो आवेदक के पास ऑनलाइन पुनः आवेदन करने का भी विकल्प उपलब्ध था. रिश्वत मांगने के आरोप पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह पूरी तरह गढ़ी गई कहानी है.
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने एक रुपये की भी मांग नहीं की है और संबंधित व्यक्ति कभी उनसे व्यक्तिगत रूप से मिला भी नहीं है. अब इस मामले में दोनों पक्षों के दावों के बीच शिकायतकर्ता द्वारा की गई जांच की मांग पर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं.
