Arrah News: (नरेन्द्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट) आरा नगर निगम क्षेत्र की सड़कों पर इन दिनों चलना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है. शहर की मुख्य सड़कों के दोनों किनारों पर भारी मात्रा में बालू और धूल पसरे रहते हैं. इस वजह से सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया चालकों को उठानी पड़ रही है. मोड़ पर या ब्रेक लगाने के दौरान बाइक चालक अचानक बालू पर फिसल जा रहे हैं, जिससे हर वक्त बड़ी दुर्घटना होने का भय बना रहता है.
हैरानी की बात यह है कि नगर निगम के सफाई कर्मी इन मुख्य रास्तों से बालू हटाने की जहमत नहीं उठा रहे हैं. यही स्थिति रेलवे के दोनों ओवरब्रिज की भी है, जहाँ पुल के किनारों पर महीनों से बालू और मिट्टी की मोटी परत जमा है, लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है.
सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति, जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग
स्थानीय शहरवासियों का आरोप है कि नगर निगम के सफाई कर्मियों और वार्डों में तैनात सफाई ठेकेदारों द्वारा सिर्फ कागजों पर और नाम के लिए झाड़ू लगाई जा रही है. नियमानुसार, सफाई एजेंसी को न सिर्फ सड़क के बीच बल्कि पूरी सड़क के दोनों छोर से बालू और मिट्टी को पूरी तरह हटाना होता है, ताकि वाहनों के टायर न फिसलें.
आरा में इसके ठीक उलट काम हो रहा है. सफाई कर्मी सड़कों के बीच में थोड़ा-बहुत कोरम पूरा कर कचरा किनारे धकेल देते हैं, जिससे पिच पर बालू का ढेर लग जाता है. सही ढंग से मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण नगर वासियों द्वारा ईमानदारी से चुकाए जा रहे होल्डिंग टैक्स और अन्य टैक्स के पैसों का सरेआम दुरुपयोग हो रहा है.
बढ़ रहा है वायु प्रदूषण, सांस के मरीजों की संख्या में इजाफा
पूरी सड़क की वैज्ञानिक ढंग से सफाई नहीं होने का सीधा असर शहर की आबोहवा पर पड़ रहा है. जब भारी वाहन इन सड़कों से गुजरते हैं, तो किनारों पर जमी धूल हवा में उड़ने लगती है. धूल के ये महीन कण वायुमंडल को बुरी तरह प्रदूषित कर रहे हैं. डॉक्टरों के अनुसार, चौबीसों घंटे हवा में उड़ती इस धूल के कारण राहगीर और आसपास के दुकानदार दमा, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और आंखों में जलन जैसी गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं.
सफाई व्यवस्था ध्वस्त, नगर निगम प्रशासन पूरी तरह उदासीन
शहर की इस बदहाली को लेकर नगर वासियों में भारी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि साफ-सफाई और नागरिक सुविधाओं के मामले में नगर निगम पूरी तरह उदासीन बना हुआ है. शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है. अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की चरम उदासीनता के कारण शहर की जनता को धूल और हादसों के साये में जीने को मजबूर होना पड़ रहा है. बुद्धिजीवियों ने जिला प्रशासन और नगर आयुक्त से मांग की है कि रात के समय सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग कराई जाए, ताकि किनारों से बालू को पूरी तरह से हटाया जा सके.
