भोजपुर के जवनिया को बचाने की पहल तेज, 52.56 करोड़ से बन रहा तटबंध महीने भर में पूरा करने का निर्देश

Arrah News : भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड में जवनिया के ग्रामीणों को गंगा कटाव से बचाने के लिए बन रहे तटबंधों के निर्माण कार्य को हर हाल में अगले एक माह के भीतर पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है. जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने स्थल निरीक्षण कर अभियंताओं एवं संवेदकों को दोटूक कहा कि मानसून को देखते हुए निर्धारित समय-सीमा में कार्य संपन्न कराएं.

आरा (भोजपुर) से नरेन्द्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट
Arrah News : गंगा नदी के दाहिने तट पर स्थित गंगापुर, भुसौला, नन्दपुर एवं दामोदरपुर (जवनिया) गांवों को कटाव से सुरक्षित रखने के लिए लगभग 1200 मीटर लंबाई में कटाव निरोधी कार्य कराया जा रहा है. इस परियोजना की प्रशासनिक स्वीकृति राशि 52.56 करोड़ रुपए है तथा वर्तमान में कार्य प्रगति पर है. निरीक्षण के दौरान जल संसाधन सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मानसून को ध्यान में रखकर सभी आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराएं. इस परियोजना के पूर्ण होने से शाहपुर प्रखंड के इन गाँवों सहित आसपास के इलाकों को गंगा के कटाव से प्रभावी सुरक्षा मिलेगी तथा स्थानीय आबादी एवं सार्वजनिक परिसंपत्तियों का संरक्षण होगा.

तटबंध का काम देखते सचिव

सचिव ने ग्रामीणों से संवाद कर मांगा फीडबैक

जवनिया गांव में निरीक्षण के दौरान डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने स्थानीय ग्रामीणों से सीधा संवाद किया. उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना तथा कार्य को और बेहतर व पारदर्शी बनाने के लिए उनसे जरूरी सुझाव मांगे. इसके साथ ही उन्होंने चल रहे निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों से फीडबैक भी लिया. निरीक्षण के दौरान जल संसाधन विभाग के वरीय अभियंता, कार्यपालक अभियंता तथा अन्य विभागीय पदाधिकारियों के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे.

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By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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