Arrah News: (नरेन्द्र प्रसाद सिंह) दिल्ली और मुजफ्फरपुर में हाल ही में हुए अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है. सुरक्षा मानकों को लेकर चलाए जा रहे विशेष जांच अभियान में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. शहर के करीब 90 प्रतिशत होटलों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों के पास फायर एनओसी नहीं है. इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए प्रशासन ने जांच तेज कर दी है.
इसी जांच के दौरान आरा के सदर मॉडल अस्पताल में फायर सेफ्टी व्यवस्था की बड़ी खामियां सामने आई हैं. जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में आग से निपटने के लिए कोई ठोस और कारगर व्यवस्था नहीं पाई गई. मौके पर निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक लापरवाही भी साफ दिखाई दी. जिससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना हुआ है.
जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई जगहों पर फायर एक्सटिंग्विशर या तो काम नहीं कर रहे थे या उनकी वैधता समाप्त हो चुकी थी. इमरजेंसी एग्जिट, फायर अलार्म और अन्य सुरक्षा उपकरणों की भी भारी कमी देखी गई. इससे स्पष्ट है कि सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है.
आनन-फानन में अपडेट किए गए अग्निशमन यंत्र
जांच के दौरान पाया गया कि अस्पताल में लगे अग्निशमन यंत्रों की एक्सपायरी दो वर्ष पहले ही समाप्त हो चुकी थी. इसके बावजूद इन्हें रिफिल नहीं कराया गया था. मुजफ्फरपुर की घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया और जल्दबाजी में इन्हें अपडेट किया गया. जिला अग्निशमन पदाधिकारी कन्हाई यादव ने भी माना कि उपकरणों की स्थिति पहले ठीक नहीं थी.
खुले तारों से बढ़ रहा खतरा
सदर अस्पताल परिसर में कई जगह बिजली के तार खुले में लटके हुए मिले. ऐसे में शॉर्ट सर्किट की आशंका लगातार बनी हुई है. अस्पताल प्रबंधन द्वारा इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जो बड़ी लापरवाही को दर्शाता है.
एनएससीयू में नहीं है फायर सेफ्टी व्यवस्था
अस्पताल का सबसे संवेदनशील विभाग एनएससीयू है, जहां नवजात शिशुओं का इलाज होता है. लेकिन यहां फायर सेफ्टी की कोई व्यवस्था नहीं पाई गई. न तो अग्निशमन यंत्र मौजूद हैं और न ही आग बुझाने के लिए पानी की व्यवस्था है. यह स्थिति नवजात बच्चों के जीवन के साथ गंभीर खिलवाड़ को दर्शाती है.
एनओसी के बावजूद नहीं हो रहा पालन
हालांकि अस्पताल प्रशासन द्वारा फायर एनओसी लिया गया है, लेकिन नियमों का पालन धरातल पर नहीं हो रहा है. इससे पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं.
फायर ऑडिट पर भी उठे सवाल
जिला अग्निशमन पदाधिकारी ने बताया कि फायर ऑडिट किया जाता है, लेकिन जब जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं दिखता तो इस प्रक्रिया की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
दो माह पहले भी लगी थी आग
करीब दो महीने पहले सदर अस्पताल के इमरजेंसी ओटी में आग लग चुकी है, जिसमें काफी सामान जल गया था. कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया था. इस घटना के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने कोई ठोस सबक नहीं लिया, जिससे अब फिर से बड़ी घटना की आशंका बनी हुई है. इस पूरी स्थिति ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है.
