भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एसटीएफ जवान की गिरफ्तारी पर भरत भूषण तिवारी के परिजनों की प्रतिक्रिया सामने आई है. भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने कहा कि एसटीएफ जवान अक्षय कुमार ने ही उनके बेटे को पहली गोली मारी थी.
उसके बाद एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा और थानाध्यक्ष राजेश मालाकर की ओर से गोली मारी गई थी. आशा देवी की ओर से जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीओ संजीत कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं. उन्होंने कहा कि एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी से उन्हें काफी राहत मिली है.
उन्होंने साजिश में शामिल सभी अधिकारियों और एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिस वालों को गिरफ्तार करने की मांग की है. कहा कि इस मामले में जिन-जिन अधिकारियों एवं जवानों की संलिप्तता सामने आ रही है, उन सभी के खिलाफ फांसी तक की सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. उन्हें सरकार की कार्यशैली पर पूरा भरोसा है और वे न्याय की उम्मीद कर रही हैं.
पिता का बयान: मुख्यमंत्री के वादों पर जताया भरोसा
भरत भूषण तिवारी के पिता काशी तिवारी ने भी सरकार के कदमों पर संतोष जाहिर किया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो वादा किया था, वे पूरा कर रहे हैं. सरकार का हर कदम न्याय की दिशा में दिखाई दे रहा है.
उन्होंने कहा था कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, इस आश्वासन के बाद उन्हें न्याय मिलने का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है.
न्यायिक जांच आयोग द्वारा आम जन से मांगे गए साक्ष्य
आरा. भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच के दूसरे चरण की कार्यवाही शुरू हो गई है. इसके तहत आयोग की ओर से आम लोगों से इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े बयान और साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा गया है. उसके लिए पुलिस फायरिंग न्यायिक जांच आयोग की ओर से 27 अगस्त तक समय सीमा निर्धारित की गई है.
पुलिस फायरिंग न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष के हवाले से सचिव सह सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुबोध कुमार श्रीवास्तव की ओर से पत्र जारी किया गया है. उसमें कहा गया है कि शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून की पुलिस कार्रवाई की पूरी घटना की न्यायिक जांच के लिए बिहार के राज्यपाल की ओर से सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया है.
आयोग मुख्य रूप से घटना की पृष्ठभूमि, घटनाक्रम और किस प्रत्यक्ष या परोक्ष परिस्थितियों की जांच करने के साथ ही पुलिस कार्रवाई के औचित्य की जांच एवं आवश्यकता अनुसार उत्तरदायित्व का निर्धारण कर रहा है.
शपथ पत्र के जरिए साक्ष्य भेजने की अंतिम तिथि 27 अगस्त
ऐसे में आयोग की ओर से प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सूचित किया जा रहा है कि व्यक्ति, व्यक्तियों का समूह, संगठन, संस्थान या सभी जो इस कार्यवाही में अभिरुचि रखते हों, वे इन बिंदुओं पर शपथ पत्र के जरिए लिखित बयान या साक्ष्य (वीडियो एवं ऑडियो की हार्ड या सॉफ्ट कॉपी) व्यक्तिगत रूप से आयोग के शिविर कार्यालय और सचिव के पास निबंधित डाक या ईमेल से 27 अगस्त तक प्रेषित कर सकते हैं. आयोग की ओर से सुनवाई की तिथि, स्थान और समय की सूचना अलग से दी जाएगी.
