अररिया जिले के फारबिसगंज शहर अंतर्गत आरबी लेन स्थित तेरापंथ भवन में तेरापंथ धर्मसंघ के अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन निर्देशानुसार 'तेरापंथ स्थापना दिवस' एवं 'गुरु पूर्णिमा' का कार्यक्रम भक्तिभाव और सानंद माहौल में संपन्न हुआ. इस अवसर पर मुंबई से पधारे उपासक द्वय सुधांशु चिंडालिया एवं प्रकाश जैन के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया.
"आत्मोत्थान और आचार की शुद्धता था आचार्य भिक्षु का लक्ष्य": प्रकाश जैन
मुंबई से पधारे सह-उपासक प्रकाश जैन ने आषाढ़ शुक्ला पूर्णिमा (तेरापंथ स्थापना दिवस) का ऐतिहासिक महत्व बताते हुए कहा कि आद्य प्रवर्तक स्वामी भिक्षु (आचार्य भिक्षु) का उद्देश्य कोई नया पंथ या संप्रदाय बनाना नहीं था, बल्कि समाज में आचार-विचार की शुद्धता लाना और आत्मोत्थान करना था.
उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा और संयम के मार्ग पर चलने के कारण ही आचार्य भिक्षु के विचारों से लोग जुड़ते गए और आज तेरापंथ धर्मसंघ पूरी दुनिया के सामने एक अनुशासित आदर्श के रूप में स्थापित है.
मर्यादा, अनुशासन और अणुव्रत आंदोलन ही संघ की पहचान: सुधांशु चिंडालिया
मुख्य प्रवक्ता उपासक सुधांशु चिंडालिया ने तेरापंथ की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि:
- मर्यादा व अनुशासन: इस संघ की सबसे बड़ी ताकत इसकी संगठनात्मक मर्यादा है.
- अणुव्रत व प्रेक्षाध्यान: अणुव्रत आंदोलन के जरिए संघ ने विश्व में नैतिक मूल्यों का प्रचार किया, जबकि प्रेक्षाध्यान और जीवन विज्ञान आज वैश्विक स्तर पर अपनाए जा रहे हैं.
- समण श्रेणी: समण-समणी श्रेणी के माध्यम से विदेशों तक जैन धर्म और सनातन सिद्धांतों का प्रसार किया जा रहा है.
उन्होंने आचार्य भिक्षु के दया, दान और विवेक से जुड़े सिद्धांतों को प्रेरक प्रसंगों व कहानियों के जरिए श्रद्धालुओं को समझाया.
फारबिसगंज में 50 दिनों तक आयोजित होंगे विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम
उपासक सुधांशु चिंडालिया ने बताया कि जैन श्वेतांबर तेरापंथ महासभा के तत्वावधान में उन क्षेत्रों में उपासकों को भेजा जा रहा है जहां साधु-साध्वी (चारित्रात्माएं) चातुर्मास हेतु नहीं पहुंच पाते. इसी कड़ी में फारबिसगंज में 50 दिनों तक श्रद्धालुओं को धर्मोपासना कराई जाएगी.
इस दौरान:
- प्रतिदिन प्रातः योग एवं प्रेक्षाध्यान की कक्षाएं चलेंगी.
- जैन विद्या कक्षा, नियमित प्रवचन, प्रतिक्रमण और युवाओं के लिए विशेष व्यक्तित्व विकास शिविर आयोजित किए जाएंगे.
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सभी श्रावक-श्राविकाओं ने वर्तमान आचार्य श्री महाश्रमण जी के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा और कृतज्ञता ज्ञापित की.
