अररिया जिले के फारबिसगंज में 'सुपर हमसफर' बस सर्विस के प्रोपराइटर के रामपुर स्थित पैतृक आवास सहित चार अलग-अलग ठिकानों पर पिछले तीन दिनों से चल रहा आयकर विभाग का सघन सर्वे शुक्रवार देर रात संपन्न हो गया. आयकर विभाग के उप निदेशक (अन्वेषण), भागलपुर के नेतृत्व में आई विशेष टीम सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर देर रात रवाना हो गई. हालांकि विभाग ने आधिकारिक रूप से कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार सर्वे में 100 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर और भारी पैमाने पर कर चोरी से जुड़े कई सनसनीखेज दस्तावेज व आंकड़े हाथ लगे हैं.
टिकट बुकिंग से हर साल करोड़ों की कमाई के सबूत मिले
आयकर अधिकारियों की छानबीन के दौरान लोकल और लंबी दूरी की बस टिकट बुकिंग के कई महत्वपूर्ण कच्चे-पक्के बहीखाते बरामद किए गए हैं.
जांच में सामने आया कि महज तीन महीने में लोकल बस टिकटों की बुकिंग से करीब 4 करोड़ रुपये का हिसाब दर्ज है, जिसके आधार पर लोकल रूट से सालाना लगभग 16 करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया जा रहा है. वहीं अन्य राज्यों में चलने वाली लंबी दूरी की अंतरराज्यीय बसों के महज 15 दिनों के रिकॉर्ड में 30 लाख रुपये का हिसाब मिला है, जो बस नेटवर्क के बड़े वित्तीय दायरे को दर्शाता है.
100 से अधिक बसों का बेड़ा, जमीन में भी बड़ा निवेश
सर्वे के दौरान बस संचालन के अलावा रियल एस्टेट और अन्य क्षेत्रों में किए गए भारी निवेश का भी खुलासा हुआ है.
दस्तावेजों की पड़ताल से पता चला है कि सुपर हमसफर बस सर्विस के पास वर्तमान में 100 से अधिक बसों का विशाल बेड़ा संचालित हो रहा है, जिसमें कुल मिलाकर लगभग 40 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है. इसके अलावा टीम को जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े कई डीड और निवेश के रिकॉर्ड भी मिले हैं. तलाशी के दौरान टीम को कुछ कटे-फटे नोट भी बरामद हुए हैं, जिनकी जांच की जा रही है.
टैक्स और पेनल्टी न भरने पर संपत्ति जब्ती और एफआईआर की तैयारी
आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी जब्त दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन के आधार पर अब कुल देय टैक्स और पेनल्टी का औपचारिक निर्धारण किया जाएगा.
यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर बकाए टैक्स व जुर्माने का भुगतान नहीं किया जाता है, तो कानून के तहत चल-अचल संपत्ति को जब्त कर वसूली की जाएगी. साथ ही, यदि दाखिल किए गए शपथ पत्र और मिले हुए आंकड़ों में बड़ा अंतर पाया जाता है, तो संबंधित धाराओं में एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है. जानकारी के मुताबिक बस संचालक ने करीब छह माह पूर्व भी 5.5 करोड़ रुपये का टैक्स जमा किया था, जिसे अब नए खुलासों के साथ जोड़कर आंका जा रहा है.
