सिकटी में सर्पदंश से अधेड़ की मौत, CHC में एंटी स्नेक वेनम न होने पर अररिया किया था रेफर, रास्ते में तोड़ा दम, परिजनों में कोहराम

Snakebite Death: अररिया जिले के सिकटी में स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी लापरवाही के कारण एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझ गया. सोहागमाड़ो गांव में जलावन निकालने के दौरान सांप के काटने से अचेत हुए 55 वर्षीय महेंद्र मंडल को जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लाया गया, तो वहाँ एंटी स्नेक वेनम (सांप काटने की सुई) उपलब्ध नहीं थी. समय पर इलाज न मिलने और रेफर की कशमकश के बीच मरीज ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया.

अररिया के सिकटी से संजय प्रताप सिंह की रिपोर्ट

Snakebite Death: अररिया जिले के सिकटी प्रखंड क्षेत्र से स्वास्थ्य महकमे को कटघरे में खड़ी करने वाली एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है. स्थानीय डेढ़ुआ पंचायत के वार्ड संख्या 05 स्थित सोहागमाड़ो गांव में जहरीले सांप के डसने (सर्पदंश) से 55 वर्षीय महेंद्र प्रसाद मंडल की इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के दौरान दर्दनाक मौत हो गई. परिजनों का सीधा आरोप है कि अगर सिकटी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में सांप काटने का इंजेक्शन समय पर उपलब्ध होता, तो शायद महेंद्र मंडल की जान बचाई जा सकती थी. अस्पताल की इस बदहाली और दवा की अनुपलब्धता को लेकर ग्रामीणों में स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है.

जलावन निकालने के दौरान विषधर ने काटा, सीएचसी में नहीं थी दवा

घटना के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए मृतक के बहनोई बीरेंद्र मंडल ने बताया कि उनके छोटे साले महेंद्र प्रसाद मंडल (55 वर्ष) गुरुवार की दोपहर बाद अपने घर के समीप बने मवेशी घर/जलावन घर से खाना पकाने के लिए सूखी लकड़ियां और जलावन लाने गए थे.

  • अचानक हुआ हमला: जैसे ही उन्होंने लकड़ियों के ढेर में हाथ डाला, वहाँ पहले से छिपे बैठे एक अत्यधिक विषैले सांप ने उनके हाथ में जोर से डस लिया. महेंद्र मंडल की चीख सुनकर परिजन तुरंत मौके पर दौड़े.
  • अस्पताल में मायूसी: सर्पदंश की भनक लगते ही आनन-फानन में अचेत हो रहे महेंद्र को लेकर परिजन तत्काल सिकटी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचे. परंतु, अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता और घोर लापरवाही तब सामने आई जब डॉक्टरों ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि अस्पताल में सांप काटने का एक भी इंजेक्शन (Anti-Snake Venom) स्टॉक में उपलब्ध नहीं है. समय बीतता देख डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के नाम पर कोरम पूरा कर मरीज को सदर अस्पताल अररिया रेफर कर दिया.

अररिया से पूर्णिया ले जाने के क्रम में तोड़ा दम, देर रात गांव पहुंचा शव

समय पर नहीं मिला इलाज: परिजनों ने बताया कि जब वे मरीज को लेकर तड़पती हुई हालत में सदर अस्पताल अररिया पहुंचे, तो वहाँ डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए आनन-फानन में एंटी स्नेक वेनम का इंजेक्शन तो लगाया, लेकिन तब तक जहर पूरे शरीर में फैल चुका था और महेंद्र की स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई थी.

सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने बेहतर लाइफ सपोर्ट और न्यूरोलॉजी सुविधाओं के लिए मरीज को उच्च संस्थान यानी पूर्णिया गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMCH) रेफर कर दिया. दुर्भाग्यवश, एम्बुलेंस से पूर्णिया ले जाने के रास्ते में ही महेंद्र प्रसाद मंडल के शरीर ने हलचल बंद कर दी और उन्होंने दम तोड़ दिया. चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया.

देर रात्रि जैसे ही मृतक का शव एम्बुलेंस से सोहागमाड़ो गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों की चीत्कारों से माहौल गमगीन हो गया.

पत्नी और मासूम बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल, सदमे में ग्रामीण

महेंद्र मंडल की असमय मौत के बाद उनके पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. मृतक की पत्नी अनिता देवी दहाड़ मारकर और छाती पीटकर रोती हुई बार-बार बेसुध हो जा रही है. उसकी जुबान से सिर्फ यही निकल रहा है कि “अब हम किसके सहारे जियेंगे, घर का कमाने वाला ही चला गया.”

वहीं, पिता के साये को खो चुके दोनों मासूम पुत्र कुंदन और मिथुन गहरे मानसिक सदमे की स्थिति में हैं. वे कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं, बस उनकी आंखों से लगातार आंसुओं की धार बह रही है.

कब सुधरेगी सीमांचल की स्वास्थ्य व्यवस्था?

स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सिविल सर्जन (CS) अररिया से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए कि आखिर बाढ़ प्रभावित और ग्रामीण इलाके के सिकटी सीएचसी जैसे महत्वपूर्ण अस्पताल में जीवन रक्षक दवाएं और एंटी स्नेक वेनम क्यों उपलब्ध नहीं थी? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में सांप और बिच्छू काटने की पर्याप्त दवाएं सुनिश्चित नहीं की गईं, तो वे कलेक्ट्रेट का घेराव करने को बाध्य होंगे.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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