जिले में रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. एक तरफ जहां प्रशासनिक अधिकारी शहर में गैस की प्रचुर उपलब्धता और सुचारू आपूर्ति का दम भर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है. शहर की विभिन्न गैस एजेंसियों और वितरण केंद्रों के बाहर सुबह की पहली किरण के साथ ही उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी अधिकांश लोगों को खाली सिलेंडर लेकर मायूस लौटना पड़ रहा है.
घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौट रहे लोग, काम-धंधा ठप
स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस वितरण वाहनों (गाड़ियों) के आने का कोई निश्चित समय तय नहीं है. लोग अपना जरूरी काम-धंधा, मजदूरी और दफ्तर छोड़कर सुबह से शाम तक सड़कों पर गाड़ियों का इंतजार करते हैं. समय पर डिलीवरी न होने और अव्यवस्था के कारण मध्यम व निम्न वर्ग के लोगों की दैनिक आजीविका बुरी तरह प्रभावित हो रही है. पूरा दिन कतार में बीत जाने के बाद भी सिलेंडर न मिलने से घरेलू स्तर पर भारी परेशानी खड़ी हो गई है.
बिना वर्दी और आईडी कार्ड के घूम रहे वेंडर, कालाबाजारी की आशंका
गैस वितरण में पारदर्शिता का घोर अभाव देखने को मिल रहा है, जिससे उपभोक्ताओं में नाराजगी है:
- पहचान का संकट: नियमों को ताक पर रखकर अधिकांश गैस वेंडर बिना किसी आधिकारिक वर्दी (यूनिफॉर्म) और पहचान पत्र (ID Card) के ही सिलेंडरों की डिलीवरी कर रहे हैं. इससे उपभोक्ताओं के लिए असली और नकली वेंडरों की पहचान करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है.
- चोरी-छिपे ऊंचे दाम: समय पर और पारदर्शी तरीके से सप्लाई न होने के कारण बाजार में सिलेंडरों की कालाबाजारी की आशंका अत्यधिक बढ़ गई है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्व और बिचौलिए वेंडरों की मिलीभगत से चोरी-छिपे ऊंचे दामों पर सिलेंडरों की रीफिलिंग और बिक्री कर रहे हैं.
डीएससी कोड का झंझट: सर्वर और नेटवर्क की बेवफाई ने बढ़ाई मुसीबत
इस डिजिटल युग में तकनीकी खामियां भी उपभोक्ताओं के लिए जी का जंजाल बन गई हैं. उपभोक्ताओं के मोबाइल पर बुकिंग के बाद डीएससी (DSC) कोड तो आ जाता है, लेकिन वितरण स्थल पर पहुंचते ही एजेंसी का सर्वर और नेटवर्क पूरी तरह ठप हो जाता है. सर्वर डाउन होने के कारण बायोमेट्रिक या कोड वेरिफिकेशन नहीं हो पाता और वेंडर सिलेंडर देने से साफ मना कर देते हैं. इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण आम उपभोक्ताओं को एक अदद सिलेंडर के लिए हफ्तों तक एजेंसियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.
उपभोक्ताओं ने लगाई जिला प्रशासन से गुहार
परेशान और आक्रोशित उपभोक्ताओं ने अररिया जिला प्रशासन और संबंधित आपूर्ति पदाधिकारी से इस बदहाली को दूर करने की मांग की है.
हमारी मांग है कि गैस की आपूर्ति को अविलंब नियमित किया जाए और हर वार्ड व मोहल्ले के लिए गैस गाड़ियों की एक निश्चित समय-सारणी (टाइम टेबल) निर्धारित की जाए. वेंडरों की मनमानी और अवैध वसूली पर तुरंत रोक लगे. इसके साथ ही ऑयल कंपनियों से बात कर सर्वर व नेटवर्क की तकनीकी समस्या का स्थाई और त्वरित समाधान निकाला जाए ताकि आम जनता को इस नारकीय स्थिति से निजात मिल सके.
