एकमात्र और छोटा अंडरपास बना मुसीबत; दो गाड़ियां आमने-सामने आते ही थमता है पहिया
भौगोलिक और स्थानीय इनपुट के अनुसार, नरपतगंज बाजार को नेशनल हाईवे दो भागों (उत्तरी और दक्षिणी भाग) में विभाजित करता है. पूरे बाजार क्षेत्र में दोनों तरफ के जुड़ाव के लिए महज एक ही अंडरपास उपलब्ध कराया गया है, जो आकार में बेहद छोटा और संकरा है.
जाम की मुख्य वजहें:
- संकीर्ण बनावट: अंडरपास की चौड़ाई इतनी कम है कि यदि दो छोटे चार पहिया वाहन (जैसे कार या ऑटो) आमने-सामने आ जाएं, तो पूरा रास्ता ब्लॉक हो जाता है.
- अनवरत आवाजाही: दिनभर बाजार के काम, कचहरी और स्कूलों के चक्कर में हजारों लोग उत्तर से दक्षिण की ओर आते-जाते हैं. वाहनों के अनियंत्रित दबाव और संकरे रास्ते के कारण मिनटों में ही यहाँ वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं.
सांसद प्रदीप सिंह के आश्वासन भी साबित हुए कागजी; जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आक्रोश
अंडरपास की इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और दुकानदारों का धैर्य अब जवाब देने लगा है. बाजार वासियों का कहना है कि यह नरपतगंज की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बुनियादी समस्या है, जिसे हर चुनाव में मुख्य मुद्दा बनाया जाता है.
कागजी साबित हुए दावे: “इस समस्या के स्थायी समाधान (फ्लाईओवर या अंडरपास के चौड़ीकरण) को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार सिर्फ झूठे आश्वासन दिए जा रहे हैं. पूर्व में भी कई बार अररिया के सांसद प्रदीप सिंह के द्वारा भी इस दिशा में ठोस पहल करने का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन धरातल पर अब तक एनएचएआई (NHAI) या प्रशासनिक स्तर से कोई कदम नहीं उठाया गया है.”
व्यापार प्रभावित, मरीजों को आफत; जिला प्रशासन से ओवरब्रिज निर्माण की मांग
सड़क के बीचों-बीच लगने वाले इस डेली जाम के कारण नरपतगंज बाजार का मुख्य व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. सबसे गंभीर स्थिति तब उत्पन्न हो जाती है जब कोई एम्बुलेंस या गंभीर मरीज इस जाम में फंस जाता है.
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और व्यावसायिक संघों ने अररिया जिला पदाधिकारी (DM) और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय से मांग की है कि नरपतगंज बाजार की बढ़ती आबादी को देखते हुए या तो इस अंडरपास की चौड़ाई बढ़ाई जाए, अथवा बाजार क्षेत्र में एक अतिरिक्त फुटओवर ब्रिज या सर्विस लेन की व्यवस्था सुदृढ़ की जाए, ताकि लोगों को इस रोज-रोज के मानसिक और शारीरिक शोषण से मुक्ति मिल सके.
नरपतगंज (अररिया) से संजीव कुमार यादव की रिपोर्ट:
