फारबिसगंज (अररिया). मरकजी व सूबाई जमीअत उलेमा की हिदायत पर जिला संगठन को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे तर्गीबी व तश्कीली अभियान के तहत जमीअत उलेमा अररिया के तत्वावधान और फारबिसगंज इकाई के प्रबंधन में एक दिवसीय शैक्षणिक, संगठनात्मक व प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई. कार्यक्रम रामपुर दक्षिण में नहर के समीप स्थित जामिया मस्जिद नूरवाली परिसर में हुआ.
झंडोत्तोलन, कुरआन की तिलावत और नात-ए-पाक से हुई शुरुआत
कार्यशाला की अध्यक्षता जमीअत उलेमा बिहार के अध्यक्ष हजरत मौलाना मुफ्ती जावेद इकबाल कासमी ने की. कार्यक्रम की शुरुआत झंडोत्तोलन, कुरआन की तिलावत और नात-ए-पाक से हुई. कार्यशाला में जिले के नौ प्रखंडों के अलावा विभिन्न पंचायतों और वार्डों से आए उलेमा, इमाम और बड़ी संख्या में आम लोग शामिल हुए.
एक वर्ष के कार्यों की समीक्षा, 50 पंचायतों में बनी समितियां
कार्यशाला के दौरान पिछले एक वर्ष में संगठन की ओर से किए गए कार्यों की समीक्षा की गई. इस दौरान बताया गया कि जिले में जिला कार्यालय स्थापित किया गया है. संगठन का नेटवर्क मजबूत करने के उद्देश्य से 50 पंचायतों और 40 वार्डों में समितियों का गठन किया गया है. कार्यशाला में इन समितियों के माध्यम से संगठनात्मक गतिविधियों और समाज सुधार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई.
कुरआन-हदीस के साथ विज्ञान और आधुनिक शिक्षा जरूरी
कार्यशाला के मुख्य अतिथि जमीअत उलेमा-ए-हिन्द के नाजिम-ए-उमूमी हजरत मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने नई पीढ़ी को धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि युवाओं को कुरआन और हदीस की शिक्षा के साथ विज्ञान, तकनीक और आधुनिक विषयों से भी जोड़ना आवश्यक है. उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया का सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग करने की अपील की.
मस्जिदों और मदरसों के पारदर्शी प्रबंधन पर जोर
मुफ्ती जावेद इकबाल कासमी ने मस्जिदों और मदरसों के ट्रस्ट आधारित प्रबंधन को मजबूत करने की आवश्यकता बताई. उन्होंने संबंधित संस्थानों की जमीन और संपत्ति के कानूनी रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने पर जोर दिया. उन्होंने स्वीकृत नक्शे के अनुसार निर्माण कार्य कराने, आय-व्यय का नियमित हिसाब रखने और समय-समय पर ऑडिट कराने की आवश्यकता पर भी चर्चा की.
नशामुक्त समाज और बिना दहेज निकाह का दिया संदेश
कार्यक्रम का संचालन कर रहे मुफ्ती अतहर कासमी ने समाज सुधार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की. उन्होंने नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की. उन्होंने बिना लेन-देन और दहेज के निकाह को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया और कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए पंचायत और वार्ड स्तर तक जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए.
2026-27 के लिए तय किए गए कई लक्ष्य
कार्यशाला में वर्ष 2026-27 के लिए संगठनात्मक और शैक्षणिक गतिविधियों के कई लक्ष्य तय किए गए. इनमें नए मकतबों की स्थापना, आदर्श मस्जिदों को सक्रिय करना और मस्जिदों में नियमित कुरआन-हदीस की तालीम को बढ़ावा देना शामिल है. इसके अलावा पंचायत स्तर तक समाज सुधार और जागरूकता कार्यक्रम पहुंचाने की दिशा में भी कार्य करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया.
सामूहिक दुआ के साथ संपन्न हुआ कार्यक्रम
कार्यशाला का समापन मौलाना हकीमुद्दीन कासमी की सामूहिक दुआ के साथ हुआ. कार्यक्रम में मौलाना अब्दुल जब्बार नदवी, मौलाना फिरोज साहब, मौलाना अबू नस्र, मौलाना आस मोहम्मद, मौलाना व मुफ्ती अब्दुर्रशीद साहब, शाहजहां शाद, मौलाना गयासुद्दीन नौमानी, मौलाना जमशेद हनफी, शादाब रामपुरी, अदनान शामी, अबू तल्हा, सफाज, मास्टर उमर, मुफ्ती महताब और जफर इमाम सहित जिले के विभिन्न प्रखंडों से बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.
