धूमधाम से मनाया गया प्रकाश उत्सव

सुबह विशेष अरदास व शबद कीर्तन से शुरु हुआ कार्यक्रम

नाम जपो, किरत करो, वंड छको

कुर्साकांटा. प्रखंड क्षेत्र के कुआड़ी वार्ड संख्या 05 स्थित गुरुनानक सिंह गुरुद्वारा में शनिवार को सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह का 359वां प्रकाश उत्सव धूमधाम के साथ संपन्न हुआ. जिसमें वक्ताओं ने कहा कि गुरु नानक देव का मुख्य उद्घोष ही था कि नाम जपो, किरत करो, वंड छको, अर्थात ईश्वर के नाम का स्मरण करो, ईमानदारी से काम करो व अपने कमाई में से बांट कर खाओ. इसलिए सभी समानता, प्रेम, भाईचारा व मानवता का संदेश देने वाले गुरुनानक देव का आज 359 वां प्रकाश उत्सव मना रहे हैं. आयोजक समिति ने बताया कि प्रकाश उत्सव को लेकर गुरुद्वारा में श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था की गई है. जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से लंगर में शामिल हुए. बताया कि प्रकाश उत्सव हमें सिक्ख समुदाय के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह की त्याग, समर्पण, उसूल व उपदेशों को स्मरण करने का दिन है. जिस मार्ग कर चलकर वे देश को नयी दिशा देने में अपने परिजनों समेत अपने संतान को भी कुर्बान कर दिया. लेकिन दासता बर्दाश्त नहीं किया. सिक्ख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह का जन्मदिवस न केवल एक धार्मिक अवसर है, बल्कि यह साहस, बलिदान व समानता के मूल्यों की सार्वजनिक अभिव्यक्ति भी है. इस दौरान कुआड़ी गुरुद्वारा से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक आध्यात्मिक गतिविधियों की विशेष छटा देखने को मिली.

सुबह विशेष अरदास व शबद कीर्तन से शुरु हुआ कार्यक्रम

गुरु गोबिंद सिंह जयंती का आरंभ प्रातःकालीन विशेष अरदास व शबद-कीर्तन से किया गया. साथ हीं गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश कर अखंड पाठ आयोजित किया गया. श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में गुरुद्वारा में एकत्र हुए व गुरु की शिक्षाओं का स्मरण किया. कीर्तन के दौरान गुरु गोबिंद सिंह के जीवन, उनके त्याग व धर्म की रक्षा के लिए किए गए संघर्षों का भावपूर्ण वर्णन किया गया. वहीं पंच प्यारे के नेतृत्व में सिख निशान साहिब लहराते हुए श्रद्धालु शामिल हुए. गतका, जो सिखों की पारंपरिक युद्धकला है, का प्रदर्शन किया गया, जिसमें युवाओं ने अनुशासन व आत्मरक्षा का संदेश दिया. इस अवसर पर लंगर सेवा की विशेष परंपरा निभाई गयी. स्वयंसेवकों ने पूरी निष्ठा से सेवा कर सामाजिक एकता का उदाहरण प्रस्तुत किया. बताया कि 1699 में स्थापित खालसा पंथ ने सिख समुदाय को संगठित कर आत्मसम्मान व साहस को नई पहचान दी. जयंती का समापन सामूहिक अरदास व शांति पाठ के साथ हुआ. मौके पर मौजूद सरदार विश्वजीत सिंह, सरदार करण सिंह, सरदार जगजीत सिंह, सरदार कामेश्वर सिंह, सरदार गोरख सिंह, सरदार नवनीत सिंह, सरदार प्रेमजीत सिंह, सरदार गुलाब सिंह, सरदार अजीत सिंह, सरदार मंजीत सिंह, सरदार अमर सिंह, डा त्रिलोक सिंह, सरदार प्रीतपाल सिंह, शरण सिंह,मिट्ठू सिंह, रवींद्र सिंह, जीतू सिंह, वचन सिंह, मंजीत सिंह के साथ मुखिया वीणा देवी, सरपंच पूजा देवी, जिप सदस्य रघुनाथ सिंह, पूर्व सरपंच सियाराम यादव, कन्हैया लाल भारती समेत काफी संख्या में सिक्ख समुदाय के इतर अन्य धर्मों के श्रद्धालु मौजूद रहे. जयंती का समापन सामूहिक अरदास व शांति पाठ के साथ हुआ.

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