अररिया में संभावित बाढ़ और सुखाड़ को लेकर हाई-लेवल मीटिंग, प्रभारी सचिव मो. सोहैल ने दिए 15 जून तक तटबंध दुरुस्त करने के निर्देश

Disaster: अररिया जिले पर मंडराते संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन और विकास योजनाओं की एक बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई. जिला प्रभारी सचिव मोहम्मद सोहैल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि 15 जून तक सभी तटबंधों की मरम्मत पूरी कर ली जाए और राहत-बचाव के लिए नावों व लाइफ जैकेट की व्यवस्था चाक-चौबंद रखी जाए.

अररिया से पंकज कुमार की रिपोर्ट

Disaster: बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव सह अररिया जिले के प्रभारी सचिव मोहम्मद सोहैल की अध्यक्षता में संभावित बाढ़, सुखाड़ की पूर्व तैयारियों, सहयोग शिविर और विभिन्न विकासात्मक योजनाओं की प्रगति को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षात्मक बैठक संपन्न हुई. समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) स्थित परमान सभागार में आयोजित इस मैराथन बैठक में प्रभारी सचिव ने जिले की भौगोलिक स्थिति, बाढ़ से प्रभावित होने वाले प्रखंडों और आपदा से निपटने के लिए उपलब्ध संसाधनों की बारीकी से समीक्षा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आपात स्थिति में आमजन की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए राहत कार्यों में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

अररिया के 6 प्रखंड ‘अत्यधिक’ तो 3 प्रखंड ‘आंशिक’ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित

बैठक के दौरान जिला प्रशासन द्वारा प्रभारी सचिव के समक्ष प्रस्तुत किए गए जिले के भौगोलिक आंकड़े और आपदा तैयारियों का विवरण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

  • बाढ़ का भौगोलिक दायरा: प्रभारी सचिव को अवगत कराया गया कि जिले के 06 प्रखंड— अररिया, जोकीहाट, पलासी, सिकटी, कुर्साकांटा और फारबिसगंज हर साल नदियों के उफान से अत्यधिक प्रभावित होते हैं. जबकि रानीगंज, नरपतगंज और भरगामा प्रखंड आंशिक रूप से प्रभावित क्षेत्रों में आते हैं. जिले की कुल 72 पंचायतें पूर्ण रूप से और 60 पंचायतें आंशिक रूप से बाढ़ की विभीषिका झेलती हैं.
  • तटबंधों की मरम्मत की डेडलाइन: जिले के चारों प्रमुख तटबंधों का संयुक्त निरीक्षण किया जा चुका है. प्रभारी सचिव ने कड़ा रुख अपनाते हुए 15 जून 2026 तक तटबंधों के शीर्ष पर बने सभी गड्ढों और रेनकट (मिट्टी का कटाव) को हर हाल में दुरुस्त करने का आदेश दिया है.

165 नावें, 10 मोटरबोट और 397 सामुदायिक रसोई केंद्र चिह्नित

आपदा प्रबंधन संसाधन: बैठक में बताया गया कि जिले में आपात स्थिति से निपटने के लिए 165 परिचालन योग्य (चालू) नावें, 10 इन्फ्लेटेबल मोटरबोट, 40,790 पॉलिथीन (प्लास्टिक) शीट, 05 महाजाल और 135 लाइफ जैकेट पूरी तरह तैयार हैं. इसके अतिरिक्त, विस्थापितों के लिए 397 सामुदायिक रसोई केंद्र (कम्युनिटी किचन) और 363 राहत शिविर (रिलीफ कैंप) चिह्नित किए जा चुके हैं. बाढ़ के दौरान राहत सामग्री और पशु चारे की निर्बाध आपूर्ति के लिए टेंडर (निविदा) प्रक्रिया भी मुकम्मल कर ली गई है.

SDRF करेगी मॉक ड्रिल, हर नाव पर होगी इमरजेंसी लाइट

प्रशासनिक दिशा-निर्देश और विभागों की जिम्मेदारी:

प्रभारी सचिव मो. सोहैल ने सभी अंचलाधिकारियों (CO) को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के बाढ़ संभावित इलाकों का अनिवार्य रूप से स्थलीय निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट अपर समाहर्ता (ADMA) आपदा प्रबंधन को सौंपें.

बैठक में विभिन्न विभागों को निम्नलिखित जिम्मेदारियां सौंपी गईं:

  • नावों का एकरारनामा: अपर समाहर्ता को सभी मरम्मत योग्य नावों को तुरंत ठीक कराने और नाविकों के साथ एकरारनामा (कॉन्ट्रैक्ट) की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा गया है. अत्यधिक संवेदनशील इलाकों में एसडीआरएफ (SDRF) की मदद से ‘मॉक ड्रिल’ आयोजित की जाएगी और प्रत्येक नाव पर लाइफ जैकेट व इमरजेंसी लाइट अनिवार्य होगी.
  • स्वास्थ्य और पेयजल: पीएचईडी (PHED) के कार्यपालक अभियंता को बाढ़ से पहले सभी चापाकलों की मरम्मत सुनिश्चित करने तथा सिविल सर्जन (CS) को बाढ़ अवधि के लिए विशेष चिकित्सा दलों (मेडिकल टीम) और जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने का निर्देश दिया गया.
  • इंडस्ट्रियल सायरन: जिला आपातकालीन संचालन केंद्र की समीक्षा में पाया गया कि सभी प्रखंडों में चेतावनी के लिए स्थापित इंडस्ट्रियल सायरन पूरी तरह कार्यशील (वर्किंग) हैं.

सुखाड़ की अग्रिम तैयारी और जनता दरबार की होगी मॉनिटरिंग

विकासात्मक योजनाओं की समीक्षा:

बाढ़ के साथ-साथ प्रभारी सचिव ने सुखाड़ की संभावित स्थिति को लेकर भी कृषि और सिंचाई विभाग को अलर्ट रहने तथा संसाधनों का अग्रिम भंडारण करने के निर्देश दिए. विकास कार्यों की समीक्षा के क्रम में जिले में निर्बाध विद्युत आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और आंगनबाड़ी केंद्रों के सुचारू संचालन की गहन जांच की गई.

सचिव ने जिला पदाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिया कि वे थानों और अंचलों में लगने वाले शनिवारीय जनता दरबार की नियमित मॉनिटरिंग (निगरानी) करें. साथ ही सभी सीओ को निर्देश दिया कि वे सरकारी भूमि की अद्यतन सूची जिला अवर निबंधक को उपलब्ध कराएं ताकि सरकारी जमीनों के अवैध निबंधन पर रोक लग सके. बैठक के अंत में ‘सहयोग शिविर’ और ‘सहयोग पोर्टल’ पर प्राप्त जन-शिकायतों के त्वरित निष्पादन की भी समीक्षा की गई.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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