जोगबनी (अररिया) से सुदीप भारती की रिपोर्ट
Araria News : जेनिथ पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल और जानी-मानी शिक्षाविद स्वर्गीय कविता खान के निधन के 40 दिन पूरे होने पर आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभा ने जोगबनी में एकता, सद्भाव और मानवता का अनूठा संदेश दिया. विद्यालय परिसर में आयोजित इस भावुक कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद और सैकड़ों नागरिक शामिल हुए. सभी ने नम आंखों से स्व. कविता खान को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया.
एक मंच पर छह धर्म, एक ही संदेश- मानवता सबसे बड़ी
कार्यक्रम की शुरुआत स्व. कविता खान की तस्वीर पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन से हुई. इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई.
सभा की सबसे खास बात यह रही कि यहां छह अलग-अलग धर्मों के धर्मगुरुओं ने अपने-अपने धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार प्रार्थना की. सनातन धर्म के वैदिक मंत्रों और रामायण स्तुति से लेकर इस्लाम धर्म में सूरह रहमान के तिलावत तक, सिख धर्म की गुरुबाणी, ईसाई धर्म के बाइबिल पाठ, बौद्ध धर्म के शांति संदेश और जैन धर्म की मोक्ष अवधारणा ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक बना दिया.
श्रद्धांजलि सभा में जुटे जनप्रतिनिधि और गणमान्य
श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए. पूर्व विधायक जाकिर हुसैन खान, फारबिसगंज विधायक मनोज विश्वास, जदयू जिलाध्यक्ष पवन मिश्रा सहित कई सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक हस्तियां कार्यक्रम में मौजूद रहीं.
वक्ताओं ने कहा कि कविता खान केवल एक शिक्षिका नहीं थीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने वाली प्रेरणास्रोत थीं. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में जो कार्य किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा.
शिक्षा के क्षेत्र में छोड़ी अमिट छाप
स्व. कविता खान ने दो दशक से अधिक समय शिक्षा सेवा को समर्पित किया. उन्होंने जेनिथ पब्लिक स्कूल को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके नेतृत्व में विद्यालय ने शिक्षा, अनुशासन और संस्कार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं.
विद्यालय के निदेशक खुर्शीद खान ने कहा कि कविता खान पूरे जेनिथ परिवार की शक्ति थीं. उनके सपनों और मूल्यों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
श्रद्धांजलि सभा बनी सामाजिक सौहार्द की मिसाल
कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक एकता और सर्वधर्म समभाव का प्रतीक बन गया. एक ही मंच पर विभिन्न धर्मों की प्रार्थनाओं ने यह संदेश दिया कि शिक्षा, मानवता और सद्भाव की कोई सीमा नहीं होती. स्व. कविता खान की स्मृति में आयोजित यह सभा लंबे समय तक लोगों के दिलों में एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में याद की जाएगी.
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