Aaj Ka Darshan: अररिया से मृगेंद्र मणि सिंह की रिपोर्ट.मां खड़गेश्वरी काली मंदिर सह बाबा खड़गेश्वर नाथ शिव मंदिर अपनी भव्यता, आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐतिहासिक पहचान के कारण पूरे सीमांचल क्षेत्र में प्रसिद्ध है. कभी फूस की झोपड़ी में स्थापित यह मंदिर आज करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है. दीपावली और काली पूजा के दौरान यहां की सजावट और पूजा-अर्चना देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.
134 साल पुरानी आस्था की कहानी
अररिया के परमान नदी क्षेत्र के पास स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर की स्थापना वर्ष 1884 में एक फूस की झोपड़ी में हुई थी. धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गयी और मंदिर का स्वरूप भी विशाल होता गया. वर्ष 1987 में मंदिर के नवनिर्माण का कार्य शुरू हुआ, जिसके बाद यह पूरे जिले की धार्मिक पहचान बन गया.
मंदिर का 152 फीट ऊंचा गुम्बद इसकी सबसे बड़ी विशेषता माना जाता है. स्थानीय लोगों का दावा है कि यह देश के प्रमुख ऊंचे काली मंदिरों में शामिल है. शाम की आरती के समय जब घंटों और शंख की आवाज गूंजती है तो पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूब जाता है.
मां की भक्ति में समर्पित हैं नानू बाबा
मंदिर की पहचान सिर्फ इसकी भव्यता नहीं, बल्कि यहां सेवा करने वाले नानू बाबा भी हैं. मशहूर फुटबॉलर रहे सरोजानंद दीक्षित ने 1970 के दशक में मंदिर की जिम्मेदारी संभाली थी. धीरे-धीरे वे मां काली की भक्ति में इतने लीन हो गये कि आज लोग उन्हें नानू बाबा के नाम से जानते हैं.
बताया जाता है कि उन्होंने अपनी अधिकांश अचल संपत्ति मंदिर के नाम कर दी और दशकों से बिना किसी स्वार्थ के मंदिर के विकास में जुटे हुए हैं. रात की पूजा और भोग आज भी नानू बाबा ही कराते हैं.
दीपावली और काली पूजा में दिखती है अद्भुत भव्यता
दीपावली और काली पूजा के दौरान मंदिर का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है. रंग-बिरंगी रोशनी, विशेष पूजा और महाभोग के आयोजन से पूरा वातावरण भक्तिमय बन जाता है. हर मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष पूजा होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं.
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