अररिया : जिस देश के 10 राज्य अकाल की मार से जूझ रहे हों, तब मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में पैसों का आवंटन बंद है, जबकि इस कार्यक्रम को बड़े पैमाने पर चलाया जाना चाहिए. इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा व पलायन भी रूकेगा. शुक्रवार को शहर के आंबेडकर नगर स्थित जन-जागरण शक्ति संगठन के कार्यालय में उपरोक्त बातें आरटीआइ एक्टिविस्ट निखिल डे ने कही. उन्होंने कहा कि मनरेगा कानून के मुताबिक मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के अंदर होना चाहिए, पर वर्ष के अंत तक 70 लाख से अधिक मास्टर रॉल की राशि लंबित है. अकाल ग्रस्त राज्यों में मनरेगा मजदूरों की हालत बदतर हो चुकी है.
मजदूर पलायन को लाचार हो रहे हैं. उन्होंने आंकड़े का हवाला देकर कहा कि अररिया जिला में मजदूरी भुगतान में देरी को ले मिलने वाला ब्याज 39.71901 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा के पैसों की कमी कर अकाल ग्रस्त बना दिया है. जो मजदूरों के हितों के खिलाफ जाता है. मौके पर कामायनी स्वामी, आशिष रंजन, रंजीत पासवान, विजय सहित अन्य मौजूद थे.
