अब्दुल बारी सिद्दीकी ने बजट को बताया लफ्फाजी, ललन सिंह बोले- टैक्स स्लैब के घटाने से नहीं होगा फायदा

केंद्र सरकार की ओर से संसद में पेश हुए आम बजट को लेकर अब बिहार में सियासत शुरू हो गई है. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस आम बजट में बिहार का जिक्र तक नहीं किया गया है. इसमें बिहार की अनदेखी की गयी है. इसमें कुछ भी खास नहीं है.

पटना. केंद्र सरकार की ओर से संसद में पेश हुए आम बजट को लेकर अब बिहार में सियासत शुरू हो गई है. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस आम बजट में बिहार का जिक्र तक नहीं किया गया है. इसमें बिहार की अनदेखी की गयी है. इसमें कुछ भी खास नहीं है. यह सपनों का सौदागर जैसा है. दूसरी ओर राजद नेता और पूर्व वित्तमंत्री अब्दुलबारी सिद्दीकी ने सीतारमण इसे अमृत काल कह रही है, हम उन्हीं से पूछना चाहते हैं कि पहले वाला बजट नर्क काल था क्या?

अर्थशास्त्र में अमृत, नर्क और स्वर्ग कहा से आ गया 

पूर्व वित्तमंत्री व राजद के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि अभी बजट भाषण ही सामने आया है. ना बजट को देखा है और ना सुना ही है. ऐसे में अभी इसपर बहुत कुछ कहा नहीं जा सकता है. उन्होंने कहा कि जब यह अमृत काल का बजट है, तो पहले वाला बजट क्या नर्क काल का था? अर्थशास्त्र में अमृत, नर्क और स्वर्ग कहा से आ गया. हम अमृत और नर्क काल नहीं जानते. उन्होंने कहा कि हम उन्हीं से पूछना चाहते हैं कि पहले वाला बजट नर्क काल था क्या? सिद्दीकी ने कहा कि देश में बेरोजगारी बढ़ी है. रेल और प्लेन का किराया घटा नहीं. नौकरी के अवसर बढ़े नहीं. तो यह लफ्फाजी ही तो है. चुनाव में धूल झौकने की कोशिश की जा रही है. वादा तेरा वादा झूठा है तेरा वादा..

बिहार के लोगों के साथ धोखा हुआ

इससे पूर्व अध्यक्ष ललन सिंह ने केंद्र सरकार को आड़े हाथ लेते कहा है कि जब आप सपने के बाद जागते हैं, तो कुछ भी सच नहीं होता है. बस ऐसा ही कुछ आज बजट से बिहार के लोगों को हुआ. इस बजट में कहीं भी बेरोजगारी, महंगाई को कैसे नियंत्रित किया जाए, इसको लेकर कुछ भी नहीं देखने को मिला. ललन सिंह ने कहा कि बिहार के लोगों के साथ धोखा हुआ है, उन्हें बहुत उम्मीद थी, लेकिन कुछ भी नहीं मिला है. टैक्स स्लैब घटाने से कोई फायदा नहीं होगा. ललन सिंह ने कहा कि मैं भारत सरकार से यह पूछना चाहता हूं कि,महंगाई को कम करने के लिए क्या कदम उठाया जा रहा है? रोजगार तो लोगों को दे नहीं रहे. जिस देश के वित्त मंत्री वाशिंगटन में जाकर कहें कि रुपया गिर नहीं रहा है, डॉलर मजबूत हो रहा है. ऐसे लोगों से क्या उम्मीद करें?

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