ट्रेन हादसाः माता- पिता की मौत से अनजान है मौली

पटना: माता पिता को ट्रेन हादसे में खो चुकी 13 साल कीमौली धवन उन्हें हर जगह तलाश रही है हर आनेजाने वाले से वो उनका पता पूछ रही है. किसी को हिम्मत नहीं हो रही है कि उससे सच कह सकें.रेल हादसे में घायल नौ यात्रियों को पीएमसीएच रेफर किया गया है. इस हादसे में […]

पटना: माता पिता को ट्रेन हादसे में खो चुकी 13 साल कीमौली धवन उन्हें हर जगह तलाश रही है हर आनेजाने वाले से वो उनका पता पूछ रही है. किसी को हिम्मत नहीं हो रही है कि उससे सच कह सकें.रेल हादसे में घायल नौ यात्रियों को पीएमसीएच रेफर किया गया है. इस हादसे में कई घायल है, तो कई अपनों को अकेला छोड़कर चले गये. 13 साल की किशोरी मौली धवन इस हादसे में अपने मां और पिता को खो चुकी है. लेकिन, मौली इस बारे में बेखबर है. पीएमसीएच आते ही वह अपने मम्मी-पापा को खोजने लगती है. वह बार-बार डॉक्टरों से बस अपने घरवालों के बारे में पूछ रही है.

लेकिन, उसकी हालत देख कर किसी का साहस नहीं होता है कि वह उसे बताये कि तुम्हारे मम्मी-पापा अब इस दुनिया में नहीं हैं. बाद में एक महिला चिकित्सक उसके पास आकर बैठती हैं, उसे कुछ-कुछ खाने को भी देती हैं. घंटों वह मौली के पास बैठी रहती हैं. मौली उस महिला चिकित्सक के अलावा और किसी से बात करने को तैयार नहीं है. तभी एक व्यक्ति कहता है, तुम्हारे घर से कोई आनेवाले हैं, जो तुमको लेकर घर जायेंगे.

पवन धवन पंजाब के फिरोजपुर की धवन कॉलोनी के निवासी थे, जबकि संजीव बेरी फिरोजपुर के विकास बिहार मुहल्ले के रहनेवाले हैं. इस घटना ने दोनों परिवारों को तबाह कर दिया. सदर अस्पताल में भरती निशांत धवन को अपनी मां-पिता की मौत की जानकारी नहीं है और वह बार-बार उन लोगों से मिलाने को कह रहा है जबकि अंशु बेरी को अपनी मां भारती बेरी की मौत की जानकारी नहीं और वह भी अपनी मां के बारे में बार-बार पूछ रहा है. दोनों युवक बार-बार अपने परिजनों की कुशलता के बारे में जानने को व्यग्र हैं. प्रत्येक आनेवाले अधिकारी से दोनों यही सवाल कर रहे हैं.

पीएमसीएच में इलाज के लिए भर्ती कराए गए यात्रियों में बिपुल सैकिया, राजू बैद्य, सपना बैद्य, आशना बेरी, संजीव बेरी, मौली धवन, अंचिता सैकिया, रीता नाथ, सेवाली शर्मा, जितेंद्र नाथ बर्मन, निरुपमा मजुमदार, चितरंजन मजुमदार, बेबा राम और चमेली देवी शामिल हैं.

घायलों में शामिल गुवहाटी की रीता नाथ जो कि उक्त ट्रेन के बी-2 बागी में यात्र कर रही थीं को सिर और सीने में चोट आयी है. रीता ने बताया कि उनके बोगी में सवार सभी यात्री रात्रि भोजन के बाद सो गए थे. जब मैं अपने बर्थ पर सोई हुई थी तो ट्रेन को एक तरफ बुरी तरह झुकने से वह जगने के पूर्व बर्थ से गिर पडीं और उसके बाद वह बेहोश हो गयीं.

उन्होंने बताया कि कुछ देर के बाद होश आने पर चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ पाया और उनके शरीर में हरकत नहीं हो रही थी तथा वे दर्द महसूस कर रही थीं.रीता ने बताया कि इसी दौरान किसी ने उन्हें बोगी से निकाला. मुझे मौत नजर आ रही थी. यह बहुत भी भयावह था. अपने जीवन में उस रात को भूल जाना चाहूंगी.

दिल्ली-डिब्रूगढ राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन के पटरी से उतरने से उत्पन्न तेज आवाज सुनकर ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौडे और रेलवे कर्मियों और चिकित्सकों के पहुंचने के पूर्व ट्रेन में फंसे यात्रियों को बचाने का कार्य शुरु दिया था. इस हादसे में घायल 13 वर्षीय किशोरी मौली धवन ने बताया कि अन्य यात्रियों की तरह वह सो रही थी तभी यह दुर्घटना घटी. मौली अपने रिश्तेदार पवन कुमार के साथ यात्र कर रही थी और इस दुर्घटना में दोनों को सिर में चोट आयी है.

अपने अभिभावकों के पास जाने के लिए रो रही मौली ने बताया कि गांव के एक चाचा ने उसके बोगी का शीशा तोडकर उसे निकाला और उसका सिर जिससे खून बह रहा था को दाबे रखा था तथा किसी ने उसपर पट्टी बांधी तथा उसे यहां लाया गया.असम के तिनसुकिया की कविता सैकिया तो इस दुर्घटना में बाल-बाल बच गयीं पर उनके पति अचिंतय सैकिया उतने भाग्यशाली नहीं थे और इस हादसे में उनके सिर में चोट आयी तथा पांव जख्मी हो गया है.

अपने पति के घायल होने से चिंतित कविता ने बताया कि वह परेशान अपने पति के rदय रोगी होने के कारण है. हम दिल्ली उनके इलाज के लिए गए थे और उक्त ट्रेन के बी-2 से उनके साथ सफर कर रहे अधिकांश यात्री इस हादसे में घायल हो गए हैं और हमें काफी मशक्कत के बाद बोगी से बाहर निकाला गया. इस हादसे में घायल अधिकांश यात्री अपने सामान को लेकर परेशान दिखे और उनमें से कुछ अस्पताल भेजे जाने से पूर्व अपने कुछ बैग ले पाए.

असम के बारपेटा रोड निवासी निरुपमा मजुमदार जो कि दिल्ली-डिब्रूगढ राजधानी ट्रेन के बी-3 बोगी में यात्र कर रही थीं ने बताया कि वह उक्त बोगी के एक बीच के बर्थ पर सोई हुई थीं. उन्होंने बताया कि हादसे के समय तेज आवाज के बाद उन्होने सबकुछ को चारों तरफ गिरते हुए देखा और उनके बांगी गिरने के बाद उपर के बर्थ पर सो रहे एक रिश्तेदार उनके उपर आ गिरे. निरुपमा के साथ यात्र कर रहे उनके पति का हाथ जख्मी हो गया.

निरुपमा ने बताया कि अब हम अपने सामान को लेकर परेशान हैं क्योंकि हम अपने साथ केवल एक पर्स और एक बैग ही ला सके हैं.उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर पहुंचे ग्रामीणों और एक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने यह भरोसा दिलाया था उनके सामान सुरक्षित रहेंगे. हमें उम्मीद है कि रेलवेकर्मी उनके सामान का ख्याल रखेंगे.

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