Bihar Politics JDU Future Leadership : जय निशांत, तय निशांत… इन नारों के बीच अब बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार के बिना जेडीयू का साम्राज्य खत्म हो जाएगा? ‘NI’ फैक्टर क्या है? और जेडीयू ने ‘NI’ को भुनाने की कोशिश अचानक से क्यों शुरू कर दी? इन सभी सवालों का जवाब आपको आगे मिलेगा. लेकिन ये बता दें कि आज JDU के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने एक पोस्टर लगाया है. यह पोस्टर उन्होंने अपने आवास पर लगाया. जिसे राजनीति चश्मे से देखा जाना तो लाजिम है.
पोस्टर के जरिए क्या संदेश?
दरअसल, बिहार की राजनीति में पोस्टर के जरिए बहुत कुछ कहा जाता है. इसके जरिए नेता और कार्यकर्ता दोनों ही संदेश-संवाद करते हैं. इतना ही नहीं सहयोगी पार्टियों को भी संकेत-संदेश दिए जाते हैं. चार दिन पहले एक पोस्टर जेडीयू दफ्तर में लगाया गया था. जिसमें निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की गुहार लगाई गई थी. यह कहा जा रहा था कि ‘जब निशांत कुमार हैं, तो फिर किसी और पर ‘विचार’ क्यों करें! यह पोस्टर कार्यकर्ताओं की ओर से लगाया गया था.
मगर जो पोस्टर आज लगा है वह खुद जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार लगाया, वह भी अपने आवास पर. इस पर लिखा गया है ‘विरासत मजबूत, भविष्य दमदार – निशांत कुमार हैं तैयार’. यानी यह साफ कहा जा रहा है कि निशांत कुमार, मुख्यमंत्री Nitish Kumar की मजबूत राजनीतिक विरासत के साथ जेडीयू और बिहार के नेतृत्व के लिए तैयार हैं. ऐसे में ये संदेश केवल कार्यकर्ताओं के लिए तो बिल्कुल भी नहीं है. यह संदेश कहीं न कहीं जेडीयू की अगली चाल की ओर इशारा करता है.
JDU की BJP को राजनीतिक चुनौती!
खैर, ये पोस्टर इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह पोस्टर किसी कार्यकर्ता की ओर से नहीं लगाया गया, और न ही इसे पार्टी दफ्तर में लगाया गया है. यह पार्टी के मुख्य प्रवक्ता Neeraj kumar की ओर से अपने आवास पर लगाया गया. इतना ही नहीं नीरज कुमार इस पोस्टर की विधिवित रूप से व्याख्या करते भी नजर आए. उन्होंने प्रभात खबर डॉट कॉम के कैमरे पर पोस्टर में लिखी हर लाइन का समझाया. एक टीचर की तरह हाथ में स्टिक लेकर. इसलिए यह Poster कोई आम पोस्टर नहीं, यह सीधे सीधे संदेश है. इसे राजनीतिक नजरिए से देखा जाना लाजमी है. इसे JDU की बीजेपी को चुनौती भी कहा जा सकता है.
‘NI’ के जरिए साफ संदेश
नीरज कुमार ने अपने इस पोस्टर के जरिए यह साफ कर दिया है कि जेडीयू के ऐसे नेता हैं जो नेतृत्व पार्टी और बिहार दोनों का नेतृत्व कर सकते हैं. उनमें सबसे पहला नाम निशांत का है. और निशांत के नेतृत्व की मांग कार्यकर्ता बिहार की जनता कर रही है. हालांकि उन्होंने बचते-बचाते यह भी कह दिया कि पार्टी में उनकी (निशांत कुमार की) भूमिका क्या होगी, यह आगे तय होगा. मगर उन्होंने पोस्टर के डिजाइन से बहुत कुछ कह डाला है.
‘NI’ जरिए ‘DNA’ की ओर इशारा?
राजनीति में कोई बात ऐसे ही नहीं कही और की जाती. हर शब्द और हर एक्शन एक स्क्रिप्ट होता है. यदि आप भी इस ‘NI’ को सामान्य और बचकानी हरकत समझने की भूल कर रहे है तो आपकी गलती हो सकती है. मगर प्रवक्ता नीरज कुमार ने अंग्रेजी के अल्फाबेट में ‘NI’ को कैपिटल लेटर में लिखकर निशांत और नीतीश का नाम लिखा है. वो अपने नेताओं कार्यकर्ताओं और बीजेपी खेमे के लिए भी बड़े संकेत हैं. नीरज कुमार ने यह साफ कर दिया है कि निशांत के पास न सिर्फ नीतीश कुमार की राजनीतिक की ‘मजबूत विरासत’ है बल्कि उनके पास ‘NI’ यानी नाम के पहले दो अक्षर ही नहीं, नीतीश का DNA भी है.
इसलिए मायने रखते हैं ये संदेश
बिहार की सियासत इन दिनों शिफ्टिंग मोड में चल रही है. सत्ता में पावर का स्थानांतरण होने वाला है. इस ‘पावर शिफ्टिंग’ का सबसे ज्यादा असर जेडीयू पर पड़ने वाला है. वजह साफ है, नीतीश कुमार अब बिहार में नहीं रहेंगे. इतना ही नहीं, वह बिहार के मुख्यमंत्री भी नहीं रहेंगे. ऐसे सबसे बड़ी चिंता जेडीयू के लिए है.
जेडीयू के हाथ से सत्ता जा रही है और नेता भी. ऐसे में जेडीयू को एक तरफ नए नेतृत्व की तलाश है वहीं, उसे एक ऐसा चेहरा भी चाहिए जिसे पार्टी के तमाम कार्यकर्ता दिल से स्वीकार करें. ऐसे यदि निशांत को आगे कर जेडीयू बिहार में सत्ता की बागडोर अपने हाथ में ले लेती है तो उसकी दोनों समस्याओं के समाधान एक साथ हो जाएगा. लिहाजा जेडीयू निशांत के नाम को आगे बढ़ा कर रही है. साथ ही बीजेपी पर दबाव बनाने बना रहेगा. फिलहाल निशांत के लिए जमीन तैयार की जा रही है. अब देखने वाली बात ये होगी कि जेडीयू निशांत को आधार बनाकर सत्ता पर कांट्रोल का दावा कब पेश करती है. फिलहाल ‘जय निशांत, तय निशांत‘ नारे सुनाई दे रहे हैं.
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