Vaibhav Sooryavanshi Coach Manish Ojha: 15 साल की उम्र में IPL और फिर भारतीय T20I टीम तक पहुंचकर सुर्खियां बटोरने वाले वैभव सूर्यवंशी अब रेड-बॉल क्रिकेट में अपनी पहचान बनाने की तैयारी में हैं. दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन के उपकप्तान बनाए गए वैभव के सामने अब चार दिवसीय क्रिकेट में खुद को साबित करने की चुनौती है. इस बीच उनके कोच मनीष ओझा ने साफ कर दिया है कि टीम इंडिया की टेस्ट टीम में जगह बनाना वैभव के लिए T20I टीम जितना आसान नहीं होगा.
मनीष ओझा का मानना है कि वैभव में टेस्ट क्रिकेट में सफल होने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी बल्लेबाजी का तरीका बदलना होगा. खासकर नई गेंद के खिलाफ धैर्य दिखाना और लंबे समय तक बल्लेबाजी करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी.
‘300 गेंद खेलकर दिखाना होगा’
मनीष ओझा ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि रेड-बॉल क्रिकेट में वैभव को मानसिक तौर पर सबसे बड़ा बदलाव करना होगा. सफेद गेंद के क्रिकेट में जहां वह लगभग हर गेंद पर आक्रमण करने की कोशिश करते हैं, वहीं टेस्ट क्रिकेट में ऐसा रवैया काम नहीं करेगा. उनके मुताबिक वैभव को सही गेंद का इंतजार करना होगा, जोखिम कम करना होगा और पारी को अलग-अलग गियर में आगे बढ़ाने की कला सीखनी होगी.
कोच ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी को दुनिया के सामने यह साबित करना होगा कि वह 300 गेंद तक बल्लेबाजी कर सकते हैं. उनके मुताबिक दलीप ट्रॉफी और आगे रणजी ट्रॉफी में मिलने वाला अनुभव वैभव के अगले कदम के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा.
टेस्ट टीम में जगह बनाना नहीं होगा आसान
ओझा ने यह भी कहा कि वैभव अभी सिर्फ 15 साल के हैं और उन्हें विकसित होने के लिए समय देना होगा. आज के दौर में युवा खिलाड़ियों को T20 क्रिकेट खेलने के काफी मौके मिलते हैं, लेकिन फर्स्ट क्लास क्रिकेट में एक सीजन में सीमित मुकाबले ही मिलते हैं.
ऐसे में टेस्ट टीम की दावेदारी मजबूत करने के लिए वैभव को लगातार रन बनाने होंगे. कोच के मुताबिक उन्हें घरेलू क्रिकेट में नियमित रूप से शतक और दोहरे शतक लगाने होंगे और यह प्रदर्शन दो-तीन साल तक लगातार जारी रखना होगा. यानी IPL और T20I में तेजी से मिली सफलता के बाद टेस्ट क्रिकेट का रास्ता वैभव के लिए लंबा और धैर्य वाला होगा.
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सफेद गेंद वाला अंदाज छोड़ना होगा
वैभव ने कम उम्र में ही अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से अलग पहचान बनाई है. IPL में उन्होंने तेजतर्रार पारियां खेलीं और इसके बाद भारत की T20I टीम में भी जगह बनाई. लेकिन रेड-बॉल क्रिकेट में उन्हें अपनी बल्लेबाजी में संतुलन लाना होगा. नई गेंद को छोड़ना, खराब गेंद का इंतजार करना, विकेट पर समय बिताना और पारी को लंबा खींचना उनके खेल का अहम हिस्सा बनाना होगा. कोच का मानना है कि यही बदलाव वैभव को एक अच्छे टी20 बल्लेबाज से लंबे फॉर्मेट के भरोसेमंद बल्लेबाज में बदल सकता है.
रेड-बॉल क्रिकेट का अनुभव बढ़ाएगी दलीप ट्रॉफी
दलीप ट्रॉफी वैभव के लिए इस दिशा में पहला बड़ा मौका है. ईस्ट जोन के उपकप्तान के तौर पर वह टूर्नामेंट में खेलेंगे और उन्हें कई अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने का मौका मिलेगा. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में वैभव ने अब तक आठ मैचों की 12 पारियों में 207 रन बनाए हैं. उनका बल्लेबाजी औसत 17.25 है और सर्वश्रेष्ठ स्कोर 93 रन है. हालांकि अंडर-19 स्तर पर उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यूथ टेस्ट में दो शतक भी लगाए हैं. अब दलीप ट्रॉफी में उनकी कोशिश फर्स्ट क्लास क्रिकेट के आंकड़ों को बेहतर करने की होगी.
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