Jasprit Bumrah: इंग्लैंड की परिस्थितियों में जहां तेज गेंदबाज मैच का रुख बदल सकते हैं, वहीं बुमराह की गैरमौजूदगी ने भारतीय आक्रमण को पूरी तरह कमजोर बना दिया. अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा, प्रसिद्ध कृष्णा और युवा प्रिंस यादव को मौका मिला, लेकिन कोई भी उस स्तर का प्रदर्शन नहीं कर सका जिसकी टीम को जरूरत थी.
दबाव बनाने में नाकाम भारतीय पेस अटैक
भारतीय टीम के प्रदर्शन को देखें तो दो बातें साफ नजर आती हैं. पहली, इंग्लैंड की स्विंग और सीम वाली परिस्थितियां आज भी भारतीय बल्लेबाजों के लिए उतनी ही कठिन हैं जितनी पहले थीं. दूसरी, जसप्रीत बुमराह के बिना भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की धार काफी कम हो जाती है. इंग्लैंड जैसी परिस्थितियों में गेंदबाजों से सिर्फ विकेट लेने की नहीं, बल्कि लगातार दबाव बनाए रखने की भी उम्मीद होती है. फिलहाल भारतीय तेज गेंदबाज इस कसौटी पर खरे नहीं उतर पाए हैं.
बुमराह क्यों हैं बाकी गेंदबाजों से अलग?
अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा और प्रसिद्ध कृष्णा सभी प्रतिभाशाली गेंदबाज हैं. इनमें क्षमता की कमी नहीं है, लेकिन महान गेंदबाज बनने के लिए सिर्फ अच्छी गेंदबाजी काफी नहीं होती. महान गेंदबाज वही होता है जो मुश्किल समय में कप्तान की पहली पसंद बने और सबसे बड़े बल्लेबाजों के सामने भी मैच का रुख बदल दे. यही विशेषता जसप्रीत बुमराह को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों में शामिल करती है. बुमराह सिर्फ विकेट नहीं लेते, बल्कि विपक्षी बल्लेबाजों की रन गति पर भी लगाम लगाते हैं. उनकी कसी हुई गेंदबाजी का फायदा दूसरे गेंदबाजों को भी मिलता है.
प्रिंस यादव के लिए अभी सीखने का दौर
युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नए हैं. ऐसे में उनसे तुरंत बड़े मैच जिताने वाले प्रदर्शन की उम्मीद करना उचित नहीं होगा. फिलहाल वह अपने करियर की शुरुआती सीखने की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और उन्हें समय दिए जाने की जरूरत है.
बड़े मुकाबलों में बुमराह ने बार-बार साबित की अपनी अहमियत
जसप्रीत बुमराह का रिकॉर्ड बताता है कि वह सिर्फ अच्छे गेंदबाज नहीं, बल्कि बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं. 2026 टी-20 विश्व कप में वेस्टइंडीज के खिलाफ अहम मुकाबले में उन्होंने एक ही ओवर में दो विकेट लेकर विपक्षी टीम की रफ्तार तोड़ दी. भारत ने वह मुकाबला चार गेंद शेष रहते जीत लिया. इसी टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ जब जैकब बेथेल और सैम करन तेजी से रन बना रहे थे, तब बुमराह ने 18वें ओवर में केवल छह रन देकर पूरा मैच भारत की ओर मोड़ दिया. इसके बाद इंग्लैंड दबाव में आ गया और भारत ने सात रन से जीत दर्ज की. 2024 टी-20 विश्व कप फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी उनका 15वां ओवर मैच का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. उन्होंने सिर्फ चार रन दिए, जिससे दबाव बढ़ा और अगले ही ओवर में हार्दिक पंड्या ने हेनरिक क्लासेन का बड़ा विकेट हासिल कर लिया. इसके बाद बुमराह ने मार्को यानसन को आउट कर दक्षिण अफ्रीका की उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया.
सिर्फ विकेट नहीं, दूसरे गेंदबाजों को भी बेहतर बनाते हैं बुमराह
बुमराह की सबसे बड़ी खासियत यही है कि उनकी गेंदबाजी का असर पूरी टीम पर दिखाई देता है. जब वह किफायती ओवर डालते हैं तो बल्लेबाज अगले ओवर में बड़े शॉट खेलने की कोशिश करते हैं और दूसरे गेंदबाजों को विकेट मिलते हैं. 2024 विश्व कप फाइनल में हार्दिक पंड्या को क्लासेन का विकेट मिलने के पीछे बुमराह के दबाव भरे ओवर की बड़ी भूमिका थी. इसी तरह 2026 विश्व कप सेमीफाइनल में भी उनके कसे हुए ओवरों ने इंग्लैंड के बल्लेबाजों को जोखिम लेने पर मजबूर किया, जिसका फायदा भारत को मिला. यही कारण है कि क्रिकेट एक्सपर्ट अक्सर कहते हैं कि बुमराह सिर्फ अपने विकेटों से नहीं, बल्कि पूरी गेंदबाजी इकाई को बेहतर बनाकर मैच जिताते हैं.
बाकी तेज गेंदबाज नहीं निभा पाए जिम्मेदारी
इंग्लैंड दौरे में भारतीय तेज गेंदबाज लगातार महंगे साबित हुए. प्रसिद्ध कृष्णा पहले मुकाबले में आयरलैंड के खिलाफ 57 रन खर्च कर बैठे और एक भी विकेट हासिल नहीं कर सके. वहीं अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा ने पिछले दो मुकाबलों में लगभग 10 की इकॉनमी से रन दिए. टी-20 क्रिकेट में इतनी महंगी गेंदबाजी किसी भी टीम के लिए मुश्किलें बढ़ा देती है. भारतीय गेंदबाजी में वह नियंत्रण और निरंतरता नजर नहीं आई जो बुमराह की पहचान रही है.
विदेशी परिस्थितियों में और बढ़ जाती है बुमराह की अहमियत
भारत की घरेलू पिचों पर बल्लेबाज अक्सर हावी रहते हैं. वहां बड़े स्कोर सामान्य बात है और गेंदबाजों की भूमिका कुछ अलग होती है. लेकिन इंग्लैंड की परिस्थितियों में गेंदबाज मैच के सबसे बड़े खिलाड़ी बन जाते हैं. यहां सीम मूवमेंट, स्विंग और बादलों वाला मौसम बल्लेबाजों के लिए चुनौती पैदा करता है. ऐसे माहौल में यदि आपके पास जसप्रीत बुमराह जैसा गेंदबाज नहीं हो तो विपक्षी टीम पर लगातार दबाव बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है. भारत के साथ इस दौरे पर यही देखने को मिला.
बीसीसीआई के सामने भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती
जसप्रीत बुमराह पिछले सात-आठ वर्षों से भारतीय गेंदबाजी की सबसे मजबूत कड़ी रहे हैं. लेकिन लगातार क्रिकेट और चोटों के कारण अब उनके कार्यभार का प्रबंधन करना जरूरी हो गया है. वह हर सीरीज और हर मैच नहीं खेल सकते. ऐसे में भारतीय क्रिकेट को ऐसे गेंदबाज तैयार करने होंगे जो विदेशी परिस्थितियों में टीम की जिम्मेदारी संभाल सकें. हालांकि क्रिकेट एक्सपर्ट मानते हैं कि बुमराह जैसे गेंदबाज किसी अकादमी या सिस्टम से तैयार नहीं किए जा सकते. ऐसी प्रतिभा बहुत कम देखने को मिलती है. सिस्टम केवल उन्हें बेहतर बनने में मदद कर सकता है.
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