Sonal Dinusha: कभी बहन ने उधार लेकर दिलाया था पहला बल्ला, अब भारत के खिलाफ 420 रन बनाकर बने श्रीलंका के स्टार

सोनल दिनुषा की कहानी संघर्ष और जुनून की मिसाल है. कभी बल्ला खरीदने के पैसे नहीं थे, आज भारत के खिलाफ 420 रन बनाकर बन गए श्रीलंका के स्टार बल्लेबाज. उनकी प्रेरणादायक यात्रा को जानें.

Sonal Dinusha Career Story: भारत के खिलाफ दूसरे टेस्ट में जब श्रीलंका पर पारी की हार का खतरा मंडरा रहा था, तब सोनल दिनुषा भारतीय गेंदबाजों के सामने चट्टान की तरह खड़े रहे. टीम इंडिया के गेंदबाजों ने श्रीलंका को समेटने की पूरी कोशिश की, लेकिन दिनुषा ने 264 गेंदों पर नाबाद 133 रन की ऐसी पारी खेली, जिसने उनकी टीम को हार से बचा लिया और टेस्ट मैच ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई. लेकिन दिनुषा की इस पारी के पीछे सिर्फ अच्छी फॉर्म या एक दिन की मेहनत नहीं थी. इसके पीछे करीब 13 साल का लंबा संघर्ष और लगातार की गई मेहनत थी. एक वक्त ऐसा भी था, जब उनके पास क्रिकेट खेलने के लिए अपना बल्ला तक नहीं था. तब उनकी बहन ने पैसे उधार लेकर उन्हें पहला बैट दिलाया था. वहीं से शुरू हुआ यह सफर आज उन्हें श्रीलंका के उन खिलाड़ियों में खड़ा कर रहा है, जिनकी चर्चा भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ शानदार प्रदर्शन के बाद हो रही है.

कभी अपना क्रिकेट बैट नहीं था

सोनल दिनुषा का क्रिकेट सफर किसी बड़े क्रिकेटिंग परिवार या शानदार सुविधाओं के साथ शुरू नहीं हुआ. बचपन में उन्हें बास्केटबॉल में भी दिलचस्पी थी. स्कूल के कोच सुसंथा फेलिक्स डायस ने उन्हें खेलते हुए देखा और क्रिकेट टीम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया. क्रिकेट से जुड़ने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी जरूरी सामान का इंतजाम करना. दिनुषा के पास अपना बल्ला तक नहीं था और परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि आसानी से नया क्रिकेट बैट खरीदा जा सके. तब उनकी बहन ने पैसे उधार लेकर छोटे सोनल के लिए पहला बल्ला खरीदा. उस समय यह सिर्फ एक क्रिकेट बैट था, लेकिन आगे चलकर यही उनके बड़े सपने की शुरुआत बना. उसी बल्ले के साथ शुरू हुआ सफर उन्हें क्लब क्रिकेट से फर्स्ट क्लास क्रिकेट और फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक लेकर गया.

11-12 साल की उम्र में कोच ने पहचानी प्रतिभा

दिनुषा जब करीब 11-12 साल के थे, तब वह कोलंबो क्रिकेट क्लब में अभ्यास किया करते थे. यहीं कोच सोनल दुलशन अलवालागे की नजर इस युवा खिलाड़ी पर पड़ी. कोच ने सिर्फ उनकी प्रतिभा नहीं देखी, बल्कि क्रिकेट के प्रति उनकी गंभीरता और मेहनत को भी पहचाना. इसके बाद दोनों का साथ एक लंबे क्रिकेटिंग सफर में बदल गया. दिनुषा के लिए यह महज क्रिकेट की ट्रेनिंग नहीं थी. आर्थिक परेशानियों के बीच खेल से जुड़े रहना भी एक चुनौती थी. परिवार और कोच के सहयोग ने उन्हें अभ्यास जारी रखने में मदद की.

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गेंदबाजी से बल्लेबाजी तक कैसे बदला दिनुषा का खेल?

क्रिकेट के शुरुआती दिनों में गेंदबाजी भी दिनुषा के खेल का हिस्सा थी. वह बाएं हाथ से स्पिन गेंदबाजी करते थे, लेकिन समय के साथ उनकी बल्लेबाजी उनकी सबसे बड़ी ताकत बनती गई. उन्होंने बल्लेबाजी में सिर्फ आक्रामक शॉट खेलने के बजाय मैच की परिस्थिति को समझना सीखा. गेंद की लाइन और लेंथ को पढ़ना, जोखिम को नियंत्रित करना और लंबी पारी खेलना उनके खेल का अहम हिस्सा बनता गया.

स्वीप शॉट को हथियार बनाने के पीछे सालों की मेहनत

जब दिनुषा युवा थे, तब उनके कोच ने उन्हें समझाया था कि एशियाई परिस्थितियों में स्पिन के खिलाफ सफल होने के लिए स्वीप शॉट बेहद उपयोगी हो सकता है. इसके बाद उन्होंने इस शॉट पर काफी मेहनत की. नेट्स में वह लंबे समय तक स्वीप का अभ्यास करते थे. कई प्रशिक्षण सत्रों में उन्होंने घंटों सिर्फ इसी शॉट को दोहराया. यह मेहनत भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज में साफ दिखाई दी. भारतीय स्पिनरों के सामने दिनुषा ने स्वीप और उसके अलग-अलग रूपों का इस्तेमाल करते हुए दबाव को कम किया और लगातार रन बनाए.

आंकड़ेबल्लेबाजीगेंदबाजी
मैच55
पारियां97
रन606321
गेंदें1034525
सर्वोच्च स्कोर133
औसत86.5753.5
स्ट्राइक रेट58.6187.5
नाबाद2
चौके52
छक्के8
शून्य0
अर्धशतक2
शतक3
मेडन6
विकेट6
इकोनॉमी3.67
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन3/22
मैच में सर्वश्रेष्ठ3/29

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भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज ने बदली दिनुषा की पहचान

भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज दिनुषा के करियर का अब तक का सबसे बड़ा मंच साबित हुई. गॉल में शतक लगाकर उन्होंने अपनी बल्लेबाजी क्षमता की झलक दिखाई. इसके बाद कोलंबो टेस्ट में भी उनका बल्ला नहीं रुका. पहली पारी में उन्होंने 103 रन बनाए और श्रीलंका के लिए एक अहम पारी खेली. हालांकि श्रीलंका की टीम पहली पारी में 290 रन पर ऑलआउट हो गई और उसे फॉलोऑन खेलना पड़ा. ऐसे समय में मेजबान टीम के सामने पारी की हार से बचने की बड़ी चुनौती थी.दूसरी पारी में दिनुषा ने जिम्मेदारी संभाली. उन्होंने 264 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 133 रन बनाए. उनकी लंबी और धैर्यपूर्ण पारी ने श्रीलंका को 429/9 तक पहुंचाने में मदद की. दो टेस्ट मैचों की सीरीज में सोनल दिनुषा ने 420 रन बनाए और उनका औसत 140 रहा. इस प्रदर्शन पर उनकी बैटिंग की तारीफ भारतीय टीम के कोच गौतम गंभीर ने भी की.

2025 में शुरू हुआ टेस्ट करियर

सोनल दिनुषा ने 25 जून 2025 को बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका सफर अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन भारत के खिलाफ प्रदर्शन ने उन्हें श्रीलंका के मध्यक्रम में एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में जरूर स्थापित किया है. अभी तक उन्होंने श्रीलंका के लिए वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण नहीं किया है. हालांकि टेस्ट क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद आने वाले समय में उन्हें सफेद गेंद की टीम में भी मौका मिल सकता है. उनके 69 फर्स्ट क्लास मैचों में 3,882 रन हैं. उनका बल्लेबाजी औसत 46.21 है. इस दौरान उन्होंने 12 शतक और 20 अर्धशतक भी लगाए हैं.

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लेखक के बारे में

By अभिजीत कुमार

अभिजीत कुमार पत्रकारिता जगत में दो वर्षों का अनुभव रखने वाले युवा पत्रकार हैं. उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), ढेंकानाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है. अपने पेशेवर सफर में उन्होंने रिपोर्टिंग, सब-एडिटिंग, पेज डिजाइन और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में कार्य किया है. वर्तमान में वह प्रभात खबर के स्पोर्ट्स डेस्क में कार्यरत हैं, जहां खेल जगत से जुड़ी खबरों के संपादन, लेखन और प्रस्तुतीकरण की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

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